रविवार, 18 दिसंबर 2016

एक पाव

आज काल के दिन म अइसने चलत हे
 तेला चार लैन म तुंहर आगू समरपित


जाथों ददा सन टूरी खोजे गांव ले ओ गांव
होथे सांझ मोर ददा जमा देथे एक पांव
टुरी खोजय म गोड हाथ पिरागे कथे ग
एक पाव पीये बिन घर म नंइ जांव
© ®
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र

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