क्यूँ
इंसानियत को मारकर मर रहा है क्यूँहोकर इंसान इंसान से डर रहा है क्यूँ
जगा अपनी ईमान खड़े हो अपने पैरों में
बिना पिये शराब यहाँ बहक रहा है क्यूँ
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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