किसी ने कहा हमसे औकात में तो रहिये...
हमने भी कहा उनसे जनाब अपनी तो कहिये....
छांव मे रहकर कहते तगड़ी बड़ी धूप है ...
हमारी तरह भरी दुपहरी तो सहिये
हमने भी कहा उनसे जनाब अपनी तो कहिये....
छांव मे रहकर कहते तगड़ी बड़ी धूप है ...
हमारी तरह भरी दुपहरी तो सहिये
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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