सुभ बिहान हो
भजत रहब दिन रात हम
प्यारे मोहन का नाम ।
ऊँखरे से होत बिंहना
होत ऊँखरे शाम।
का रखल भला इहाँ
जिनगानी में ऊँखरे शिवा,
जपत रहब रात अउ दिन
हरे कृष्णा हरे राम।।
भजत रहब दिन रात हम
प्यारे मोहन का नाम ।
ऊँखरे से होत बिंहना
होत ऊँखरे शाम।
का रखल भला इहाँ
जिनगानी में ऊँखरे शिवा,
जपत रहब रात अउ दिन
हरे कृष्णा हरे राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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