मंगलवार, 21 जून 2016

विश्व योग दिवस २१/०६/१६



॥ योग॥

पृष्ठभूमि-
उपनिषद मे ॐकार के उपासना आदि रूप मे योग दर्शन के बीज पाए जथे। भगवान नरायन हिरण्यगर्भ भगवान शिव ल एखर मूल सियान माने जथे। जेमा हठ योग राजयोग क्रियायोग लय योग अउ नाना भांति के योग के संगे संग ग्यान भगति करम के संग ले योग ह ब्यहवार म आय लगिस।
योग के अरथ होथे जुड़ना। आतमा ले परमातमा के संग मिलन होना ही योग कहलाथे। पतंजलि महाराज ह कहिथे-'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'
चित एक अइसे नदिया ए जेमा नाना परकार के दोस जइसे काम क्रोध लोभ मोह मद मतसर राग द्वेस के कारण मन म कामना के लहरा उठत रहिथे ।जेला शांत करे के उदीम ह योग हे। अपन चित भीतरी म भरे जम्मो विकार ल दूर करेले हम अपन मूल रूप ल पा सकत हन। योग ल पाए बर हमनला अष्टांगयोग के सहारा ले बर पडही। पतंजलि महाराज कहिथे-"यमनियमासनप्राणायमप्रत्याहारधारणाध्यान समाधयोअष्टांगानि।"
यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान अउ समाधि ह योग के आठ अंग हरे।
१.यम नियम के माध्यम ले तन अउ मन ल शुद्ध रखे के परयास करे जथे।
२.नियम-"शौच संतोष तप: स्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि नियमा:" बहिरी भीतरी के शुद्धि संतोष भाव तपस्या स्वाध्याय अउ अपन पसंद के अनुसार भगवान के रूप के अराधना ह नियम हरे।
३.आसन-चित ल एक जगा मढ़ाएबर ध्यान लगाएबर एक जगा म बइठे के अभ्यास करना जरूरी हे ।जेला अनेक परकार के आसन लगाके किए जा सकत हे। पतंजलि महाराज कहिथे-"स्थिरसुखासनम्" सुख पूरवक बिना हिलेडुले स्थिर होके बइठना ही आसन हे।
४.प्राणायाम-"तस्मिनसति श्वासप्रश्वासयोर्गति विच्छेद: प्राणायामः।" बिचार भावना अउ श्वासा ल अपन नियंत्रन मे रखे के अभ्यास ह प्रणाय़ाम कहलाथे।
५.प्रत्याहार-"स्वविषया सम्प्रयोगे चित्तस्वरुपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः।" अपन चित ल शब्द स्पर्श रूप रस गंध अउ नाना परकार के बिसय ले अलग करके स्थिर बइठइ ल प्रत्याहार कहिथे।
६.धारणा-"देशबन्धशचित्तस्य धारणा।" अपन चित्त ल कोई बिसेस बिसय म लगाना धारन करना धारणा कहिलाथे।
७.ध्यान-"तत्र प्रत्ययैकंतानता ध्यानम् " कोई बिसय बस्तु मे पूरा मन ला चित्त ल एकाग्र करके साधन कर लेना ही ध्यान हे।
८.समाधि-"तदेवार्थमात्रनिर्भासस्वरुपशून्यमिव समाधि:।" जब बहिरी दुनिया के जम्मो जिनिस ल छोड़के मात्र आत्मसरूप के परकाश के दरसन होथे त इही ल समाधि कथे।
#आचार्य_तोषण

हलधर मोर

धरले नांगर तै खांध मा धरती के बेटा
बजावत सेवा जे रात दिन झिन सिराय जांगर तोर
तन ले तै पसीना ओगराथस चटनी बासी खाथस
चंदा जस लकलक दमके माटी सनाय मुख ह तोर
#आचार्य_तोषण
हलधर मोर

#जय_श्री_राम



सियापति के भक्त प्रिय अंतस राम बसाय।
चुटकी लिए करतल म राम नाम गुन गाय।।

हनुमान की जयकारा हर दिन सबका प्यारा हो।
हेलो हाय कहते सभी राम सीताराम हमारा हो।।

कामना सबकी पूरी हो कभी कोई न अधूरी हो ।
एक घडी या दो घडी राम का नाम जरूरी हो ।।

बोलना हंसकर सभी से न रखना मन में बैर।
परमेश्वर के दरबार मे रहेगी तुम्हारी खैर।।

जपते रहो राम नाम को चरन में रखना ध्यान।
एक दिन मिल जाएंगे संत जन स्वयं भगवान।।

कण कण राम बसे झांकी सियाराम की।
सूझ वाली आंख ने प्रभु की पहचान की।।

तुझमे राम मुझमे राम सबमें राम समाया।
सबसे करलो प्रेम जग मे कोई नही पराया।।
#जय_श्री_राम

आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा

इसकूल डहर जुरियात हे...




बीतगे चलव गरमी के छुट्टी
पढई के दिन अब आवत हे
जम्मो दीदी भइय्या बहिनी
इसकूल डहर जुरियात हे

घुमेन फिरेन बढिहा छुट्टी मा
आजा बबा अउ आजी घर
दाई ददा संग भइय्या भउजी
जुरियाईन सबझन सादी बर
पहाड़ा पट्टी कलम अउ झोरा
जाएबर इसकूल सोरियात हे
जम्मो दीदी भइय्या बहिनी
इसकूल डहर जुरियात हे

अ के अनार आमा के आ
इमली के इ अउ ईख के ई
पढ़य लिखय बड़ मजा लेके
उल्लु ऊन संग ऋषि ऋषि
एडी ऐनक ओखली औरत
अं अउ अ: पढ़ात हे
जम्मो दीदी भइय्या बहिनी
इसकूल डहर जुरियात हे

क ले कलम ख ले खरगोश
गमला के ग अउ घ ले घड़ी
च ले चरखा छ ले छतरी
ज ले जहाज झ के झड़ी
टमाटर के ट ठ के ठंडी
डमरू ढक्कन ल बजात हे
जम्मो दीदी भइय्या बहिनी
इसकूल डहर जुरियात हे

त ले तलवार थन के थ
दवात धनुष नल के न
प ले पतंग बकरी के ब
भ ले भगत मछरी के म
यश रस्सी अउ लड़का के ल
वक के व श ले शलजम खात हे
जम्मो दीदी भइय्या बहिनी
इसकूल डहर जुरियात हे

ष के षटकोण स ले सरोता
हलवई के ह संग क्ष ले क्षत्री
त्रिशूल के त्र ज्ञानी के ज्ञ
ननपन ले बताए हे जनयित्री
पेनसिल ले पेन धराए सबला
सबला ज्ञान बगरात हे
जम्मो दीदी भइय्या बहिनी
इसकूल डहर जुरियात हे
#आचार्य_तोषण

बनादो मुझे प्यार का इक सरोवर


बनादो मुझे प्यार का इक सरोवर
डुबकर जमाना जिसमें नहाने लगे...
समेट लो मुझे अपनी हर गीतो में
हर कोई जुबां पे अपनी गुनगुनाने लगे...
आशिकी मे आशिके अंदाज़ हो नया
बीते हर पहलू सबको पुराने लगे...
दीवाना हो मेरी मदभरी अदाओ का
दीवानगी मेरी हर किसी को फसाने लगे...
मोहबते एहसास हो हर दिल पे 'तोषण'
सांसो से होकर रूह में समाने लगे...

गैरो से ही

गैरो से ही मिलता रहा प्यार हमें "तोषण"
अपने ही घोंपते रहे छूरा पीठ पीछे

पेंड़ लगाओ वर्षा लाओ

~~~~पेंड़~~~~~~~
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पेंड़ लगाओ वर्षा लाओ
हर तरफ हरियाली हो
मानो जैसै त्योहार सदा
होली और दीवाली हो
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पेंड़ से है जीवन अपना
इन्हीं से मिलती है दवा
देती है हमें अनेकों फल
फैलाती सदा शुद्ध हवा
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बचाती हमेशा धूप से
देती हरपल ठंडी छांव
हरा भरा खुशहाल सभी
ऐसा है प्यारा मेरा गांव
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पेड़ों मे भगवान बसे है
करलो सब इनकी पूजा
है हम सबकी जीवनदात्री
नही कोई है इनसा दूजा
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गाथा गाई न जाए इनकी
पेंड हमें देता है वरदान
पेंड़ हमारे हितैषी सदा
जानकर है क्यूं अनजान
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सुंदर गांव और सुंदर वन
पेंड़ से ही पर्यावरण सुंदर
पर्यावरण बचाना है सबको
धरलो बात ये मन के अंदर
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आचार्य तोषण
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लहुट आ बदरा झिन मुहुं ल फेर

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लहुट आ बदरा झिन मुहुं ल फेर
अगोरा तोर झन कर अब तै देर
कांटा खूंटी मेड पार चतरागे सब
जोहत हंव तोर रद्दा बइठके मुढेर
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खेती किसानी के दिन हर आगे
कोन जनी तै कोन मेरन लुकागे
अइसन काबर हमला भुलाए
आंख मिचौली म तोर डर लागे
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कोठी ले बीजहा धान निकलगे
नांगर बइला संग जुंडा संवरगे
धरंव तुतारी हाथ मा टुकना
पानी बादर बिन सबो रबकग
े🌾🌾🌾🌾🌾🌾�🌧⛈🌩☁🌦🌥⛅
अबक तबक लागत हे मोला
चकवा बरोबर निहारंव तोला
पनिया जबर बरसादे बदरवा
हरस जही मन माटी के चोला
🌾🌾🌾🌾🌾🌾�🌧⛈🌩☁🌦🌥⛅‪
#‎आचार्य_तोषण

तेरे हुस्न-ए-आफताब की

तेरे हुस्न-ए-आफताब की
क्या तारीफ करूं ऐ जान...
तुमसे ही मेरी दुनिया शुरूहुए पुरे सब दिल के अरमान...
ख्वाब सजाई हर कदम मेरी
फना कर दिए अपनी दिल-ओ-जान...
दिए जहां ने हजारों गम तुझे
नही हुई रुख़सत अक्स से मुस्कान...
निभाते रहना युहीं साथ हमसफर
सजाएंगे "तोषण" तुझे बनकर बागबान...
#आचार्य_तोषण

देख दुनिया के चेहरे

 देख दुनिया के चेहरे को तेवर बदल गये
आईना के आगे आते ही सभी सम्हल गये

बचपन से बुढ़ापे तक का ऐसा सफर यारो
झुर्रियां आई चेहरे पर सर के बाल पक गये

गुमान था जिस चेहरे पर जवानी मे हमको
आज वही चेहरा अपना देखो पिचक गये

लगाए कभी मलमल जिस पर पावडर क्रीम
आई बुढ़ापा लाठी टेक जवानी यूंही ढल गये

आए हम दुनिया में न रहा खुशी का ठिकाना
सेवा जतन करने से पहले अपने बदल गये
#आचार्य_तोषण

बंद की जब आंखें दुनिया वही की वहीं थी"तोषण"
आंखें खुली तो देखा पूरी कायनात बदल गई...

 का तोर का मोर जाबे एक दिन सबला छोड़
गालै तेहर राम भजन राम चरन म नाता जोड़

मलाल रहेगा हमेशा

सबको प्यार भरा नमस्कार साथियों
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मलाल रहेगा हमेशा हमें उस पल का "तोषण"
गुजारे जो पल थे साथ मिलकर हमनें
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न तुमने कुछ कहा न कहा कुछ कभी हमने
धडकने इतनी बढ़ी कि पा रही थीं न थमने
लडखडा रही थी जुबां कुछ गलत न हो जाए
लगे एक दुजे पे लब मानो बर्फ जैसे जमने ।।
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फूलों से हर कोई करना चाहते हैं दोस्ती
क्या "तोषण" के हाथ कांटों से बंधे है ?
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तुम अगर सच्चे हो तो झूठा मैं भी नहीं "तोषण"
चलता है सिक्का अपना भी बाजार के इक कोने में

दर से तेरे ऐ खुदा

दर से तेरे ऐ खुदा खाली हाथ न जाऊंगा
यकीं मुझे है तुझपे मन की मुरादें पाऊंगा
बरसाते रहना रहमोकरम मुझ पर अपनी
हर इक दफ़ा तेरा ही गजल गुनगुनाऊंगा।

मुझको प्यार भी तुझसे है और ऐतबार भी
इनकार भी है मौला तुझसे और इजहार भी
रश्मियाँ बिखेरेंगे आफताब जब तलक जहान में
आता रहेगा नाम तेरा ईश्वर या परवरदिगार भी

#आचार्य_तोषण

मोर ममता मुरती...

 
मोर ममता मुरती,चरन चढांव श्रद्धा फूल।
सोजहा मग रेंगा,झीन होवय कहीं भूल।।
बदला उपकार के,कइसे दाई चुकाहूं।
किरपा हावय तोर,कइसे ओला भुलाहूं।।
गा नी पांव तोला,मनवा आरूग नदान।
सबले बड़का नांव, छोटकन मोर जबान।।
अकेला चले चलंव, जननी हावस सहारा।
संग मोर नई रते, मुश्किल रिहीस गुजारा।।
मोर हर स्वांसा मा, दाई हे अधिकार तोर।
सबला करंव अरपन,तन मन हे तोर का मोर।।
मोर बर दाईधाम ते, हावस सुगघर तिहि छांव।
तोर दया किरपा के, सुगघर पीरीत के छांव।।
आशीष ले तोर मा,जिनगानी हमर चलत हे।
मया के तोर डेहरी, परिवार सुगघर बढत हे।।
हांथ ले तोर दाई, क्षमता ममता बरसथे।
जनम ले कोरा मा, देंवता घलक तरसथे।।

आचार्य तोषण ९६१७५८९६६७

शिक्षा अउ संस्कार

शिक्षा अउ संस्कार के पहिली बेटी जग म आय
मया भरे डेरोठी चिरई सही चींव चींव चहचहाय
बेटी हे तभे हमर जिनगी हे ए पूनित धराधाम मपढ़े लिखे गुणी मुनी ल काबर समझ नइ आय

बेटा पाए के आस म बेटी ल कोख म मारत हस
शिक्षा अउ संस्कार दौ काबर गोहार पारत हस
वाह रे पढ़े लिखे परबुधिया नइहे थोरकन बुध
बेटा-बेटी एक समान कहिके सेखी बघारत हस

बोली अइसन बोलव मत जेखर न कोनो अर्थ हे
ऊंच शिक्षा ऊंचहा बिचार संस्कार बिन बियर्थ हे
मया बेटा बर आनी बानी बेटी के थोर नइहे सुध
शिक्षा-संस्कार दे बेटी ल थोरकन नइ समर्थ हे

खडे कर दे पढ़ा लिखा बना बेटी ल तै हुंशियार
सीता जीजा मनु जइसन कुटके भरदे तै संस्कार
भरत भूमि के मान बढही फक्र करही हिन्दुस्थान
कल्पना सही उडाही नभ म फैलही जग उजियार

लहर-लहर लहरावै नभ म बेटी सही परचम नइहे
पढ़ा लिखा तै बेटी ल अउ दुसर कोई धरम नइहे
बरत रहे नित दीया सरी चमकत रहे चंदा असन
बांटै जग ल ए परकाश बेटी सूरूज ले कम नइहे

"बेटी बचाओ बेटी पढाओ"
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आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद छ ग

सोमवार, 13 जून 2016

रविवार, 12 जून 2016

आचार्य तोषण के रचना: पेंड़

आचार्य तोषण के रचना:
पेंड़:
~~~~~पेंड़~~~~~~~
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पेंड़ लगाओ वर्षा लाओ
हर तरफ हरियाली हो
मानो जैसै त्योहार सदा
होली और दीवाली हो
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~~~~~~~~~~~...

पेंड़

~~~~~पेंड़~~~~~~~🌾🌾🌾🌾🌾🌾~~~~~~~~~~~~~~
पेंड़ लगाओ वर्षा लाओ
हर तरफ हरियाली हो
मानो जैसै त्योहार सदा
होली और दीवाली हो
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पेंड़ से है जीवन अपना
इन्हीं से मिलती है दवा
देती है हमें अनेकों फल
फैलाती सदा शुद्ध हवा
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बचाती हमेशा धूप से
देती हरपल ठंडी छांव
हरा भरा खुशहाल सभ
 ऐसा है प्यारा मेरा गांव
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पेड़ों मे भगवान बसे है
करलो सब इनकी पूजा
है हम सबकी जीवनदात्री
नही कोई है इनसा दूजा
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गाथा गाई न जाए इनकी
पेंड हमें देता है वरदान
पेंड़ हमारे हितैषी सदा
जानकर है क्यूं अनजान
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सुंदर गांव और सुंदर वन
पेंड़ से ही पर्यावरण सुंदर
पर्यावरण बचाना है सबको
धरलो बात ये मन के अंदर
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आचार्य तोषण~~~~
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बुढ़ापा

देख दुनिया के चेहरे को तेवर बदल गये आईना के आगे आते ही सभी सम्हल गये बचपन से बुढ़ापे तक का ऐसा सफर यारो झुर्रियां आई चेहरे पर सर के बाल पक गये गुमान था जिस चेहरे पर जवानी मे हमको आज वही चेहरा अपना देखो पिचक गये लगाए कभी मलमल जिस पर पावडर क्रीम आई बुढ़ापा लाठी टेक जवानी यूंही ढल गये आए हम दुनिया में न रहा खुशी का ठिकाना सेवा जतन करने से पहले अपने बदल गये #आचार्य_तोषण

शुक्रवार, 10 जून 2016

मया के चिनहा

तोर मया के चिनहा ल राखे रहूं सजाके।
  मोर हिरदे के कुरिया म ठोहूं तारा लगाके।
    अगोरा म तोर बइठे हावंव रद्दा म नैना गड़ाके।
      कतिक दिन ले देखहूं मैंहा लहूं चूरी पहिराके।।
        मोर मया के कुरिया ल कब तै अंजोर करबे।
          बिन रंग मोर दुनिया ल कब सतरंगी रंग भरबे।।
            मोरो सुध तै लेले पगली बइहा बरन मोर हाल हे।
              बिन तोर जिनगी बिताना मोर जी के जंजाल हे।
                मया के चिनहा देके तैहा जादा काबर तड़पात हस।
                  अंगना मोर आहूं कहिके काबर टुंहू देखात हस।।
                    मर जहूं तोर सुधरई मा जादा झन बेकरार कर।
                     कर मोर संग बिहाव पगली जिनगी के मोर उद्धार कर।।
                                                                                 - आचार्य तोषण

गुरुवार, 2 जून 2016

#‎राम_राम‬ #

कलजुग समजुग आन नहिं जे नर कर बिसवास।
गाइ राम गुन गन बिमल भव तरहिं बिनुहि प्रयास।
‪#‎राम_राम‬ #
जिनगी डोंगा पार करे राम सियापति के गाथा।
बालमिकी तुलसी जस संत जेला नंवाए माथा।।

मरा कहिले या राम कहिले आहे प्रभु के नाम।
सुबे भजले मंझनिया भजले भजले तैहा शाम।।
लेके का आहस तेहा का लेके तैहा जाबे।
भुलाए रहिबे माया मा ते राम नाम ल गाबे।।
राम के नाम सार जग बाकी सब बेकार हे।
मन एला बसाले हमर जिनगी के अधार हे।।
रेटहा हावे जिनगी डोंगा राम हमर पतवार।
भव सागर अगम दहरा राम लगाही ओ पार।।
राम नाम के खेती करले ए जिनगी बंजर हे।
माया नचावय हमला मन नादय बन बंदर हे।।
मोर मोर झनकर मनवा दूदिन के जिनगानी हे।
हांस के गोठियाले भजले राम नाम के बानी हे।।
राम नाम मोर मुंहले निकले धन्य हे मोर भाग।
सियाबर के परताप ले ए फुटहा करम गे जाग।।
राम नाम के महिमा गजब लीला हे अपरम्पपार।
मे आरूग अढ़हा "तोषण" कहां पहूं राम के पार।।
‪#‎राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम‬#
‪#‎आचार्य‬ ‪#‎तोषण‬
‪#‎धनगांव_डौंडीलोहारा‬
‪#‎बालोद_छत्तीसगढ़‬

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...