मंगलवार, 21 जून 2016

मोर ममता मुरती...

 
मोर ममता मुरती,चरन चढांव श्रद्धा फूल।
सोजहा मग रेंगा,झीन होवय कहीं भूल।।
बदला उपकार के,कइसे दाई चुकाहूं।
किरपा हावय तोर,कइसे ओला भुलाहूं।।
गा नी पांव तोला,मनवा आरूग नदान।
सबले बड़का नांव, छोटकन मोर जबान।।
अकेला चले चलंव, जननी हावस सहारा।
संग मोर नई रते, मुश्किल रिहीस गुजारा।।
मोर हर स्वांसा मा, दाई हे अधिकार तोर।
सबला करंव अरपन,तन मन हे तोर का मोर।।
मोर बर दाईधाम ते, हावस सुगघर तिहि छांव।
तोर दया किरपा के, सुगघर पीरीत के छांव।।
आशीष ले तोर मा,जिनगानी हमर चलत हे।
मया के तोर डेहरी, परिवार सुगघर बढत हे।।
हांथ ले तोर दाई, क्षमता ममता बरसथे।
जनम ले कोरा मा, देंवता घलक तरसथे।।

आचार्य तोषण ९६१७५८९६६७

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