रविवार, 12 जून 2016

बुढ़ापा

देख दुनिया के चेहरे को तेवर बदल गये आईना के आगे आते ही सभी सम्हल गये बचपन से बुढ़ापे तक का ऐसा सफर यारो झुर्रियां आई चेहरे पर सर के बाल पक गये गुमान था जिस चेहरे पर जवानी मे हमको आज वही चेहरा अपना देखो पिचक गये लगाए कभी मलमल जिस पर पावडर क्रीम आई बुढ़ापा लाठी टेक जवानी यूंही ढल गये आए हम दुनिया में न रहा खुशी का ठिकाना सेवा जतन करने से पहले अपने बदल गये #आचार्य_तोषण

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