मंगलवार, 21 जून 2016

लहुट आ बदरा झिन मुहुं ल फेर

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लहुट आ बदरा झिन मुहुं ल फेर
अगोरा तोर झन कर अब तै देर
कांटा खूंटी मेड पार चतरागे सब
जोहत हंव तोर रद्दा बइठके मुढेर
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खेती किसानी के दिन हर आगे
कोन जनी तै कोन मेरन लुकागे
अइसन काबर हमला भुलाए
आंख मिचौली म तोर डर लागे
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कोठी ले बीजहा धान निकलगे
नांगर बइला संग जुंडा संवरगे
धरंव तुतारी हाथ मा टुकना
पानी बादर बिन सबो रबकग
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अबक तबक लागत हे मोला
चकवा बरोबर निहारंव तोला
पनिया जबर बरसादे बदरवा
हरस जही मन माटी के चोला
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#‎आचार्य_तोषण

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