*चलो फिर आज से एक नई जिंदगी जीते हैं।*
*गिले शिकवे नसीब के चलो मिलके सीते हैं।*
*मिलेंगे राहों पे फिर से वही कालकूट"तोषण",*
*लेकर उस रब का नाम घोर हलाहल पीते हैं।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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