शुक्रवार, 9 जून 2017

नई जिंदगी

*चलो फिर आज से एक नई जिंदगी जीते हैं।*
*गिले शिकवे नसीब के चलो मिलके सीते हैं।*
*मिलेंगे राहों पे फिर से वही कालकूट"तोषण",*
*लेकर उस रब का नाम घोर हलाहल पीते हैं।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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