करम करत उमर पहागे करिया चुँदी होगे सफेद
धरम करत जीवन बीते बदरा गोठ ओती खेद
देखाय खाय के दांत ल एक्के बरोबर तै जतन
पुन के गघरी तभे भरही जब पेंदी नंइ रही छेद
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