शुक्रवार, 19 मई 2017

बोर..

सब रहते हैं मदमस्त अपने में
किसी की यहाँ कोई शोर नहीं
जा रहा हूँ...सब छोड़ के यारों
हो न जाऊँ  भीड़ मे बोर कहीं
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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