कलम की सुगंध छंदशाला मंच को सादर नमन
विधा:- दोहा
विषय:-जीवन है अनमोल
दिनाँक:-6/4/20202
दिन:-सोमवार
परमारथ को साथ रख,मीठी वाणी बोल।
रख मन में सदभावना, तब जीवन अनमोल।।1।।
जीवन ये अनमोल है,गाते संत सुजान।
बिन विवेक इंसान ज्यों,लगता ढोर समान।।2।।
जीवन दीपक नित जले,देता चले प्रकाश।
दिनकर दे नव चेतना,चमके नित आकाश।।3।।
धर्म कर्म बिन साधना,बिरथा बाजा ढोल।
परहित मन में है नहीं, क्या जीवन का मोल।।4।।
तोषण हिय में धारणा,बोली तौले बोल।
सुख दुख में सब साथ हो,जीवन है अनमोल।।5।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
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