*सुधारोपरांत सादर समीक्षार्थ*
विधा दोहा
विषय समय
दिनांक १६/१२/१९
दिन सोमवार
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समय कभी रुकता नहीं,नहीं कहीं है ठौर।
गाती कोयल जान कर,झूमे अमिया बौर।।१।।
समय देख कर ही रखें ,एक एक पग फूँक।
आएगा यमराज जब,हो जाएगा मूक।।२।।
समय बड़ा बलवान है, करें समय में काम।
समय चाल को जान कर ,मत कर तू आराम।।३।।
समय एक सा है नहीं,सबको नाच नचाय।
राजा दानी कर्ण भी,इसका पार न पाय।।४।।
नहीं समय पर बस यहाँ, गर्व न कर इंसान।
मिट जानी है जिन्दगी, चलना है शमशान।।५।।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
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