गढ़लव दोहा छंद सब,रखलव थोरिक ध्यान।
तेरा ग्यारा के नियम,चार चरण के मान।
चार चरण के मान,अंत में गुरु लघु बाँधव।
पहिली राखव झिन जगण,छंद ला बढ़िहा छाँदव।
दिनकर के हे बात,गाँठ ले कनिहा कसलव।
जल्दी मिलही भान,छंद दोहा सब गढ़लव।
तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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