मंगलवार, 21 जुलाई 2020

गीत


रिमझिम सावन देख , गीत है गाती पुरवा।
मोर पंख ले साथ,सजे है मानों दुरवा।
बरसे मेघ अथाह,दामिनी मद मे डोले।
दिनकर देखे मौन,हृदय खाये हिचकोले।

तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

गुरु

गुरू पूर्णिमा विशेष गीत

गुरूदेव तुम्हारे चरणों में,
बसे हैं चारो धाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


मात पिता है प्रथम गुरूजी,
चलना हमें सिखाया।
सर्दी गर्मी और बरखा में,
छत्र की छाँव बिठाया।
कभी न पूरा ऋण ये होगा,
सुबह से लेकर शाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


शिक्षा दीक्षा दान करे हैं,
सत्य मार्ग दिखलाया।
पाप पुण्य भेद सारे,
गुरूवर ने है बताया।
धर्म कर्म और नीति नियम,
भरे हैं आठो याम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


हमको देने नित रोशनी, 
बनकर दीपक जल रहे
कितनी भी आए बाधाएँ, 
ढाल सम है डटे रहे
चरणों में है तेरे झुके, 
राम कृष्ण सुखधाम
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


आशीष सदा बनायें रखना, 
दिनकर की अरदास।
बनकर मेरी प्रेरणा, 
रहना सदा मेरे पास।
कारज कोई भी हो पहले,
जपूँ मैं तेरा नाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।

रचनाकार:-
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

बुधवार, 24 जून 2020

पावस

कलम की सुगंध छंदशाला
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
विधा:- कुण्डलियाँ
दिनाँक :-24/06/2020
दिन :-बुधवार

1.
पावस पर्वत में गिरे,मुदित हुआ संसार।
लगती धरणी श्यामला,छाई खुशी अपार।।
छाई खुशी अपार,मगन हो झूमे सारे।
हरा भरा परिवार, वृक्ष भी वारे न्यारे।
दिनकर बैठा मौन,देखकर गहन अमावस।
सकल विश्व में धूम,लौट आई है पावस।

2.
आई है पावस लौट कर,फिर धरती के पास।
हरने धरती की व्यथा,करने जीव उजास।।
करने जीव उजास,गीत है सावन गाते।
भरा भरा है ताल,राग जो झिंगु सुनाते।
भड़क उठी है मेघ ,बहे है नित पुरवाई।
दिनकर देखे मौन,झूम के बरखा आई।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 22 जून 2020

जय जवान (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


दिनाँक:-22/06/2020
दिन:-सोमवार
विधा :-दोहा
विषय :-जय जवान

सर्द गर्म बरसात हो,चलते सीना तान।
करे निरंतर चौकसी,मेरे वीर जवान।।1।।

बनकर जो फौलाद ये,लड़ते हैं पुरजोर।
खड़े रहे हिमशिखर पर,हिम आलय की छोर।।2।।

भारत माँ के लाल हैं,करते सिंह दहाड़।
शत्रु पसीनेंं पोछते,खाते लाख पछाड़।।3।।

खड़ा रहे दिन रात जो,रखने भारत शान।
हँसते हँसते ये सभी,त्यज देते है जान।।4।।

माता ऐसी धन्य है,दिये लाल बलिदान।
भारत मेरा देश ये,है जवान की खान।।5।।

जय जवान कहते चलें,रक्षित जिनसे देश।
शिक्षक और किसान भी,थामे है परिवेश।।6।।


सुन लो हे सरकार ये,सुखी रहे परिवार।
दिनकर भी अब साथ है,माने जग संसार।।7।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

जिद तो अपनी भी थी...

मुक्त गजल 

जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे।
गुजर  जाए  जिंन्दगी तुझे भुलाने में ।

ढूँढती रही नजर मंजर-ए-तन्हाई पे,
गुम हो गई कहां,कौन से कैदखाने में ।

रूखसत हो गई गुलिस्ताँ-ए-इश्क  से,
चुभाना पड़ा हाथ बागबाँ सजाने में।

अर्ज है न गुजरो राह कभी इश़्क के,
आएगा "दिनकर" जहाँ के निशाने में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 9 जून 2020

राम नाम हे सार


राम नाम हे सार रे,जपले तै हरि नाम।
जाती बेरा थोरकिन,करले बढ़िहा काम।।
करले बढ़िहा काम तै,होवय जग मा शोर।
दया मया ला बाँट ले, बात मान ले  मोर।।
बात मान ले मोर सुन,राम भजन मा झूम।
तोर मोर के फेर मा,ऐती ओत न घूम।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

करम के नाँगर


रोला

बने बने तँय साध,करम के नाँगर धरले।
बोंले बीजा पोठ,धरम के कोठी भरले।
रखले मीठ जुबान,बात ते करले गुरतुर।
शक्कर मिशरी घोर,कभू नइ होवय चुरपुर।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

तेरा मेरा

सिंहनी

तेरा मेरा फेरा,करता मनवा प्रचंड डेरा जानो।
सारा जीवन निकला,करतब करता सब ही तुम मानो।।1।।

पलपल करता रहता,लीला प्रभु की अनंत शाखा फैली।
जपलो भजलो प्यारे,मत कर मन को दिनकर यूँ मैली।।2।।

ढूँढो मत दर मंदिर,मिलता सबको सनाथ जग सारा।
कोई फेरे माला,मन से है जो कोई भी हारा।।3।।
 
दिनकर बाँटे आभा,जगमग सारा जहान सुन लो भाई।
बाँटो भाईचारा,झूमे अवनी अंबर पुरवाई।।4।।

कृष्णा राधा जोड़ी,खेले मधुबन उमंग शंकर नाचे।
ताली बजती भारी,नित दिनकर लिखते पढ़ते साचे।।5।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 8 जून 2020

उगा भास्कर

हाइकु 575 का वार्णिक काव्य है जिसमें कट मार्क का विशेष महत्व है।उससे दो बिम्ब की झलक मिलती है। कट मार्क से कारण और फल प्रदर्शित होता है।


उगा भास्कर-
सरोवर में तैरता 
हंस का जोड़ा।1।

पराग कण-
मंडराता भँवरा
पुष्प बाग मे।2।

अमा की रात-
टिमटिमाते जुग्नू
धरती पर।3।

नदी बहती-
पावस प्रदेश में
हिरण झूंड।4।

बरखा आई-
लहराता सागर
अम्बर तले।5।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

हम तुम

हम तुम दोनों साथियाँ,एक बाग के फूल।
कभी नहीं होगी कहो, इक दूजे से भूल।।1

मिलकर हम तुम साथ हो,पथ हो चाहे शूल।
एक रहेंगे नेक हम,बनकर प्रेमी फूल।।2

हम तुम तुम हम एक हैं,जानें है संसार।
कभी रूक पाये नहीं, हम दोनों का प्यार।।3

बनकर हम तुम सारथी,रथ हाँके दिन रैन।
निहारती हो जग सदा, इक दूजे के नैन।।4


दिनकर बाँटे रोशनी, हम तुम पालें आभ।
भोर किरण देती हमें,लाख टका का लाभ।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

रविवार, 7 जून 2020

बीज (तोषण चुरेन्द्र "दिनकर")


विधा :-घनाक्षरी
दिनाँक :-7/6/20
दिन :-रविवार
विषय :-बीज
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..............भारती किसान प्यारे,
..........धरती के हैं दुलारे
....खेतों में ये बीज बोयें,
हलबा महान है।।1।।

............बरसे प्रेम प्रकृति की,
........बीज हुआ अंकुरित,
....लेकर जनम नया,
भरे परवान है।।2।।

............नव रंग जब चढ़ा,
.........सीना ताने वृक्ष खड़ा,
....राहगीर बैठ छाँव,
मिटाते थकान है।।3।।

...........पक कर बीज बनो,
........परहित काज करो,
....नाज करे सारा जहां,
करे गुणगान है।।4।।
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तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
डौंडी लोहारा बालोद

रविवार, 31 मई 2020

दिनकर का प्यार

तुझसे मिलने को दिल आज भी बेकरार है।
बरसो से था जिसका आज भी इंतजार है।

मुझसे रूठ गयी नाराजगी किस बात की,
समझ न पाया आखिर ये कैसा टकरार है।

रखा था मैने तुम्हें सर आँखों पे बिठाकर,
जानूँ न मेरी कौन सी बातों से इनकार है।

महकती रहेगी हमेशा गुल बनकर तेरी यादें,
तेरी हर एक एहसास से जिंदगी गुलजार है।

भूलादे तुम्हें रूह से अपने कभी मानना नही,
लगता तुने जाना नहीं ये दिनकर का प्यार है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगांव, डौंडी लोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़,9575070689

शनिवार, 9 मई 2020

लाकडाऊन

*आज दिनांक 9/5/20 व 10/5/20 के लोकडाउन करने में सरकार के दोहरे मत को देखते हुए एक छोटी सी रचना*

*कुण्डलिनी*

देख लाकडाऊन असर,रोजगार भरमार।
कृषक जगत के काम को,बंद करे सरकार।
बंद करे सरकार,काम की कैसा माया।
आधे मरते भूख,आध को काम दिलाया।


*कुण्डलियाँ*

कहते सबसे गाँव में,मुखिया अपनी बात।
धरे कभी ना कान में,बड़ी अजब सौगात।
बड़ी अजब सौगात,खरी खोटी दे गाली।
फिर भी मुखिया आज,करे सबकी रखवाली।
मिले आध को काम,आध हैं भूखे रहते।
कृषक हुये नाराज,देख के बतिया कहते।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
युवा सरपंच व साहित्यकार
ग्राम पंचायत धनगांव

शनिवार, 2 मई 2020

वंदना प्रभु राम को

चंडिका छंद
१३/१३
१३/१३

मिरचा भजिया राँधके,
चटनी तगड़ा भाँजके।
खाले जी अरुणाभ तँय,
भेजत हँव गा पोठ मँय।

नरवा तीर कछार मा,
आबे सोज करार मा।
ठाड़े रहिहँव खेत मा,
देखत रहिहँव नेट मा।।

उल्लाला छंद

८'५/८'५
८'५/८'५

वंदना है प्रभु राम को,
दर्शन की है कामना।
मिल जाए आशीष जो,
चाहूँ कोई धाम ना।।

आए हैं दरबार में,
भर दो झोली आज ये।
तरसे है दीदार को,
मेरे तख्तो ताज ये।।

रखवाला है साथ जो,
गम है किस बात का।
दिल को है विश्वास तो,
डर क्यों काली रात का।।

दिनकर का दिन ढले,
छाई रजनी चाँदनी।
वंदना होती साँझ में,
मचले  है गजगामिनी।

-@तोषण दिनकर

सोमवार, 27 अप्रैल 2020

कृपा

सुप्रभातम्

छप्पय में एक प्रयास

बरसे मुझपे आज,कृपा जी रघुवर तेरी।
पूरन कर दो काज,धन्य हो जीवन मेरी।
जपूँ नाम दिन रात,आस ये लेकर मन में।
दैहिक भौतिक ताप,समाये मत इस तन में।
विनती है कर जोड़कर,सब कुछ तेरे हाथ में।
छुट जाए सारे जगत,रहना बस तुम साथ में।।

-तोषण दिनकर

रविवार, 26 अप्रैल 2020

पोथी पढ़ो पुरान

पोथी पढ़ो पुरान,बिना गुरु के ज्ञान नहीं।
राम कृष्ण भगवान,भला छुटकर रहे कहीं।
बालक ध्रुव प्रहलाद,भक्ति मति माता शारद।
जन्म हुआ आबाद,मिले गुरु जैसे नारद।
अरुण निगम गुरुदेव जी,मिले सदा आशीष हो।
छंद के छ परिवार ये,चमके लाख बरीष हो।

तोषण दिनकर

जयकारी

जिनगी राहत करले मोर
मरबे ताहाँ कइसे तोर
जाँगर हा टुट जाही तोर
बुढ़वा पन में दाँत निपोर।.....जय गंगान

घर में खुसरे रहव सियान
राखे रहिहव बात ल ध्यान
परही नइते धर बूची कान
किजरव झन गा  दिनमान।.....जय गंगान

कोरोना देवव दुतकार
काहत हावय जी सरकार
आनी बानी के लोकाचार
पड़ही नइते डंडा मार।....जय गंगान

दिनकर के तै बात ल मान
डारव झन जोखिम जान
काहत हावँव जी ईमान
राखव संगी मोरो मान।......जय गंगान


-तोषण दिनकर

गलती

गलती मेरी ज्ञात हो,हम भी है हकदार।
रोक टोक हमपे करो,जरा करो उपकार।
जरा करो उपकार,बात तो सच्ची बोलो।
कमी कहाँ पर भार,राज भी अपनी खोलो।
कह दिनकर कर जोड़,बात ही सच्ची फलती।
हमसे मुँह मत मोड़,सभी मिल पकड़े गलती।

-तोषण दिनकर

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

छंद के छ स्थापना

छंद के छ परिवार के स्थापना दिवस म संस्थापक गुरुदेव अरुण कुमार जी निगम के संग सबो छंदकार मन ला बधाई...

गुरू ज्ञान के कोठरी,बाँटे नित्य सज्ञान।
बिन माँगे आशीष दे,कारज करे महान।।१।।

अपनी चिन्ता छोड़कर,सदा बाँटते ज्ञान।
देकर के आशीष सब,गढ़ते शिष्य  सुजान।।२।।


गुरू चरण मे शीश दो,लेलो भरभर ज्ञान।
मिले ज्ञान को बाँट लो,कारज यही महान।।३।।

बिना गुरू के ज्ञान कब,पोथी पढ़ो पुरान।
लेने शिक्षा स्वयं गये,राम कृष्ण भगवान।।४।।

दर्श किये भगवान का,बालक ध्रुव प्रहलाद।
नारद जैसे गुरु मिले,जनम हुआ आबाद।।५।।

अरुण निगम गुरुदेव जी,मिले सदा आशीष।
छंद के छ परिवार ये,चमके लाख बरीष।।६।।

-तोषण दिनकर

बेटी


॥बेटी॥
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बेटी बनके जनम धरेंव, दाई ओ तोर कोरा मा।
दिन कटै हे दाई तोर, एकठन बेटा के अगोरा मा।

मोर छठ्ठी मा रुखा सुखा,सगा सोदर नइ मानेस ।
का बनगेंव बैरी दुसमन, अपन लइका नइ जानेस।

तहूं बेटी रेहे अपन दाई के,महूं तोरे छंइहा आवंव।
रहूं तोर संग आघू पाछू, छोड़ तोला कहां जावंव।

का बेटा हा सबरदिन,अपन पुरखा कुल तारत हे।
बेटी घलो कम नइहे, मइके ससुरार ल उबारत हे।

तइहा के बात बइहा लेगे,नवा जमाना आवत हे।
आज बेटी बेटा संन,कदम ले कदम मिलावत हे।

बेटी जागिस जीजा बाई, कोरा मा शिवा खेलाय।
गरजिस हाबे लछमी बाई, अंगरेज दूरिहा भागय।

महूं ल थोरकून पढन दे,जिनगी ल अपन गढन दे।
नांव होवय मोर संग तुहर,अइसन करम करन दे।

मरहूं  देश बर जीहूं देश बर ,देश के सेवा बजाहूं।
चहूंओर ए दुनिया मा ,भारत के तिरंगा लहराहूं।
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 तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...