पोथी पढ़ो पुरान,बिना गुरु के ज्ञान नहीं।
राम कृष्ण भगवान,भला छुटकर रहे कहीं।
बालक ध्रुव प्रहलाद,भक्ति मति माता शारद।
जन्म हुआ आबाद,मिले गुरु जैसे नारद।
अरुण निगम गुरुदेव जी,मिले सदा आशीष हो।
छंद के छ परिवार ये,चमके लाख बरीष हो।
तोषण दिनकर
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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