मोर शीतला के दरबार में बरे जोत दिन राती
सरधा के करसा मड़ाएंव भक्ति जलाएंव बाती
कोनों मनावय जात्रा करके उंनडत जावय कोनों
सेवा बजावंव माता के मैं जागंव नवदिन राती
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७
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