काबर तै सपना देखाथस काबर तै जीवरा जराथस
छतिया मा मारे गोली मोर सवरेंगी गोरी
जिनगी म करदे तै अंजोर......
सुरता ह तोर बैरी जब जब मोला आथे
मनभंवरा बइहा होके रोई रोई गाना गाथे
काबर तरसाए मोला मया नंइ लागे का तोला
पुरवइय्या करत हावे शोर सवरेंगी जोही
जिनगी म करदे तै अंजोर....
आजा रे उड़त चिरइय्या बन कोयली गीत सुनाथे
आँखी ले आँसू निकले मया के दुख हरियाथे
मन मा समाए काबर आसा देखाए काबर
मया के बाँधे तैह डोर सवरेंगी बैरी
जिनगी म करदे तै अंजोर.....
सुघरई म होगेंव दीवाना बैरी होगेहे जमाना
संगी मन हांसे मोला का करिहंव तिही बताना
दिल ल तड़पाए काबर जादू बरसाए काबर
सुध बुध ल लेई डारे मोर सवरेंगी गोरी
जिनगी म करदे तै अंजोर......
तोषण कुमार चुरेन्द्र
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें