याहा देखव संगी जमाना कइसन आगे
आवत चोर ल देख के घर के रखवार भागे
तावा कस तिपे भोंभरा म बिन चप्पल के रेंगे
कन कनले ठंडा पानी म जिमी कांदा उसनागे...
बड़ सुघ्घर गोठ हे हमर देस डिजिटल होवत हे
चक्कर म डिजिटल के गड़बड़ फिजिकल होवत हे
छोटे बड़े टुरी टुरा के हांथ म हे मोबाइल "तोषण"
आँखी लगत चसमा दाई ददा बर डिफिकल होवत हे
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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