शुक्रवार, 31 मार्च 2017

सीख


पाके  तोरे  सीख  ला, देहुं  सदा  मैं ध्यान.
करहुं  निरंतर  चेष्टा,  लेहुं  मरत  ले  ग्यान..
लेहुं मरत ले ग्यान, भूल ही  नही जियत ले.
हावंव मतिमंद सखा,पड़े जी नीर पियत ले..
सुन  तोषण के बात, रचे छंद ग्यान बुझाके.
गलती  होही   सही,  सीख  ला  तोरे  पाके..
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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