महिमा हावय निक तोर, सबले हस तै पोठ ।
कोन करे जी रक्षा अब, कोन करे हे गोठ ।।
कोन करे हे गोठ, फुरसद नंइहे काम ले ।
नीर पिये सब आज, प्यास बुझत अब दाम ले ।।
सुन तोषण के बात, धरले गठरी सही मा ।
निकले महि चीर के, तोर निक हावय महिमा ।।
🖋तोषण कुमार चुरेन्द्र🖋
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