बुधवार, 8 अप्रैल 2020

आनी बानी रंग

छत्तीसगढ़ी कुण्डलियाँ

आनी बानी रंग हे,
           घोर-घोर के घोर।
बइरी मन हर देख के,
           नाचे मुड़ चिभोर।
नाचे मुड़ चिभोर,
           थाप सुनके नंगारा।
दुरिहा इरषा होय,
            रहे गा भाईचारा।
रंगव सातो रंग,
            बचाके संगी पानी।
भजिया गुजिया संग,
            चुरे खइ आनी बानी।

तोषण दिनकर

किरपा

किरपा सबके साथ हो,होवय झिन अभिमान।।
भूल चूक ला दे क्षमा,नइहे थोरिक ग्यान।
नइहे थोरिक ग्यान,करँव तबले मुँहजोरी।
सनके सबके बात,फेर करथँव कमचोरी।
कह तोषण कर जोर,दिखँव जी मँयहर शिलपा।
रखहूँ सब बर मान,बने जी तुँहरो किरपा।।

तोषण धनगंइहा

अनुसुइया वचन

विषय पावन
विधा चौपाई
दिनाँक 12/03/20

पावन मेरी जननी धरती।
मातु सती देवी अवतरती।
लक्ष्मी दुर्गा काली बनकर।
अरियों को भेदी है तनकर।1।

मनु मर्दानी सदा कहाई।
वनदेवी सीता सुखदाई।
शबरी झूठा बेर खिलाई।
प्रेम मगन राघव है खाई।2।

अनुसुइया की सती कहानी।
याद सदा है लोक जुबानी।
मात सिया को शिक्षा देती।
करते बखान सब नेती नेती।3।

दक्षिण कौशल पावन मेरा।
महानदी की उद्गम डेरा।
अरपा पैरी सोढुर राजे।
राजिम नगरी सुंदर साजे।4।

धन्य धन्य है दन्तेवाड़ा।
लगती है नित जहाँ अखाड़ा।
बमलाई है रक्षा करती।
भक्तों के नित संकट हरती।5।

है पावन यह पटल हमारा।
करते  रहे  सदा  विस्तारा।
साधक साधन साध्य सारे।
लग जायें करने विस्तारे।6।

तोषण है नित माथ नँवाता।
शाम सुबह बस गीता गाता।
जय श्री राम बसे घट अंदर।
सुमिरत बिदा हुये दशकंधर।7।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

परिषद

छत्तीसगढ़िहा कुण्डलियाँ

परिषद तबहे जी हमर,बनही हीरा खान।
एक दुसर ल देख के,सीखन अउ सीखान।
सीखन अउ सीखान,समय जी थोरिक देवव।
अड़हा नाविक जान,नाव ला बढ़िहा खेवव।
कह तोषण कर जोर,भाव ले मन मा गदगद।
खिलही डोहरु फूल,चढ़ै गा सीढ़ी  परिषद।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

बासी चटनी खाले ठनके

त्वरित कविता

बाई जी कथे मोला जी 
का बतावँव तोला जी
आठ बजत ले सुते रहिथस
बारा बजत ले जागत रहिथस

रात दिन मोबाइल के ध्यान रथे
रहिथे कहीं सुरता जेन कोनों कथे
मोर बार ल मानस निही
आगू पाछु ल जानस निही

कथे मोरो तीर ध्यान लगाय कर 
मछरी कोतरी  भूंजी लाय कर 
तभे तो तोला खवाहू जी
संग संग महूँ खाहूँ जी

महूँ ह कहेंव डुमेश के दाई
जादा झन कर ना करलाई
करोना वायरस फइले हवय
सब झन देखले घइले हवय

बासी चटनी खाले जमके
रही तन हा सबके ठनके
दारभात ल खावव संगी
जय श्री राम गावव संगी।।

तोषण धनगंइहा

कोरोना का डर

कुण्डलियाँ में एक प्रयास...

कोरोना का डर...

कोरोना का डर यहाँ,
            फैला चारों ओर।
कैसा है यह वायरस,
            नहीं दवा का शोर।।
नहीं दवा का शोर,
            करें नव उपचार सभी।
चिन्ता का यह फेर,
            कटे जल्दी रोग अभी।
कह तोषण कर जोड़,
            हाथ को प्रतिदिन धोना।
करना सभी विरोध,
            डरे भागे कोरोना।


चौपाल गली चौक को,
            बंद करे सरकार।
पता दवा की है नहीं, 
            जनता है लाचार।।
जनता है लाचार,
            सोचते बैठे सारे।
कोई तो उपचार,
            ढूँढ लो मोदी प्यारे।
कह तोषण कर जोड़,
            भीड़ जाओ महाबली।
दें कोरोना फेंक ,
             झुमें हर चौपाल गली।

कवि तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
सरपंच, ग्राम पंचायत धनगांव डौं.लोहारा

आजा दाती

कज्जल छंद विधान
मात्रा भार 14-14
सूत्र
2-2-2-2-3-3
4-4-3-3

सादर नमन
छंद:- कज्जल छंद 

आजा  दाती राह फूल।
चरणों  तेरी  न हो धूल।
राजे कर में जो त्रिशूल।
आती  है नव रात मूल।

लाली चुनरी आभ रूप।
है  लगती  मैया  अनूप।
मेरी  माता  है   स्वरूप।
बिखरी  देखो  नई  धूप।

आयी  पावन  चैत रात।
होगी  माता  मुलाकात।
दर्शन  तेरी  बड़ी  बात।
बैरी  की  हो खरी मात।

टेकूँ  नित  मैं  तुझे माथ।
बनकर  दास रहूँ सनाथ।
मिलता है आशीष साथ।
पूजा करते  सिया  नाथ।

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

प्रार्थना

*प्रार्थना*

जनता से है प्रार्थना,मर्जी अपनी चले ना,
नियम सरकार का, भी तो अपनाइये।

सबकी ये सोच बने,सीना ताने आगे खड़ें
गाँव के मुखिया का ,साथ तो निभाइये।

लड़ना कोरोना से है,कहना सभी से है ये,
मिलकर आज सब,कदम बढ़ाइये।

कोरोना ये भाग जाए, सावधानी अपनायें।
जन जन मिलकर,चेतना जगाइये।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौं.लोहारा बालोद छ.ग.

राम नाम जाप

*दोहा गजल*

राग द्वेष सब छोड़कर, जाप करो श्री राम।
आशा पूरन नित करे,बनते बिगड़े काम।

पूरा करते काज को,सदा करे कल्याण,
भगत हुये हनुमान जी, करे भजन निष्काम।1।

राम राम तुलसी जपे,रचा नया इतिहास,
अंतिम अवसर में मिला, प्रभु चरण सुखधाम।2।

हे मानव अब जाग जा,गहरी निद्रा त्याग,
ध्यान करो श्री राम को,अद्भुत मिले विश्राम।3।

धनुष बाण करतल सजे,मुख पर है मुस्कान,
हाथ जोड़ 'दिनकर' खड़ा,शत शत करे प्रणाम।4।

-तोषण दिनकर

मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

दिनकर

🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आदरणीय संजय कौशिक "विज्ञात" जी और आदरणीया अनिता मंदिलवार "सपना"दीदी जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आपने मुझे उपनाम देने के योग्य समझा, इसके लिए बहुत बहुत आभार...💐💐💐

सारे जग के तम हरूँ,मिला बड़ा उपनाम।
धन्य धन्य विज्ञात जी,करूँ सदा हित काम।
करूँ सदा हित काम,साधना साधक जोगी।
रहूँ साहित्य दास,नित्य नव रचना होगी।
कह दिनकर कर जोड़,बनूँ नित सेवक प्यारे।
दो खुशियों के पुष्प,जगत को सौपूँ सारे।।

-तोषण कुमार चुरेन्द्र"दिनकर"

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

जीवन है अनमोल

कलम की सुगंध छंदशाला मंच को सादर नमन

विधा:- दोहा
विषय:-जीवन है अनमोल
दिनाँक:-6/4/20202
दिन:-सोमवार

परमारथ को साथ रख,मीठी वाणी बोल।
रख मन में सदभावना, तब जीवन अनमोल।।1।।

जीवन ये अनमोल है,गाते संत सुजान।
बिन विवेक इंसान ज्यों,लगता ढोर समान।।2।।

जीवन दीपक नित जले,देता चले प्रकाश।
दिनकर दे नव चेतना,चमके नित आकाश।।3।।

धर्म कर्म बिन साधना,बिरथा बाजा ढोल।
परहित मन में है नहीं, क्या जीवन का मोल।।4।।

तोषण हिय में धारणा,बोली तौले बोल।
सुख दुख में सब साथ हो,जीवन है अनमोल।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

रविवार, 5 अप्रैल 2020

राम राज्य

मंच को सादर नमन

विधा घनाक्षरी
विषय राम राज्य
दिनाँक 05/04/2020
दिन रविवार

जागे पहले मानवता मिटे सब दानवता,
चलें सच्ची राह साथी झूठ हार जाएगा।

दुखियों के सेवा होवे,भूखे कोई नहीं सोवे,
कर भला दुसरों की देव बन जाएगा।

सभी का आदर करे मीठी मीठी बातें करें,
आगे आके बैरी प्यारे गले लग जाएगा।

नवधा सा ज्ञान मिले,खुशियों के पुष्प खिले,
तभी मेरे भारत में राम राज्य आएगा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

भारत मेरा देश है

चंडिका में लघु प्रयत्न
मात्रा भार १३-१३
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भारत  मेरा देश है,
अलग यहाँ का वेश है।
ऋषि मुनियों की ये धरा,
ध्यान प्राण अब ला जरा ।१।

 जन्म जहाँ है राम का ,
नटवर नागर धाम का ।
रावण को  संघारता,
कंस अधम है हारता ।२।

आया था जब गजनवी,
महापात वो दानवी।
हार मान वो है गया,
मिली यहाँ भरके दया।३।

विलायती की मार से,
जगे हिंद अब ताड़ के।
दुश्मन के छक्के छुटे,
इधर उधर हैं सिर फुटे।४।

दुविधा से है जुझ रहा,
जाने कितना घुँट रहा,
रोती ये नर नारियाँ,
बड़ी अजीब बिमारियाँ।५।

विपदा ये विकराल है,
कालों के भी काल है।
कोरोना जो नाम है,
पता नहीं अंजाम है।६।

कोरोना को अब मात दें,
भारत का सब साथ दें।
घर में ही जनता रहे,
यूँ ही बस कुछ दिन सहे।७।

बादल ये छट जाएगा,
अच्छा दिन अब आएगा।
सबका जो सहयोग हो,
यही महा संयोग हो।८।

मिलकर ये सब जानले, 
जा कोरोना ठान ले।
लौट नही वो आएगा, 
मुकी लात अब खाएगा।९।

मिलकर जो सब साथ हो,
जोश-जोश की बात हो।
कोरोना पछताएगा, 
छोड देश अब जाएगा।१०।

कोयल काली जब कुँजे,
भारत माता जय गुँजे।
तोषण मत यूँ हार ना,
कोरोना को मारना।११।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.
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बेटी//कोरोना

हंसगति छंद अनजान
न जान है न पहचान 
फिर भी एक प्रथम प्रयास
सादर
नमन मंच
मात्रा भार ११/९

बेटी.......

बेटी अपनी जान,जरा सुनले माँ।
कब से हूँ मैं द्वार,करेगी कब हाँ।
निर्मम यह संसार,नमो हे भोली।
नैना तरसे नेह, भरे  कब  झोली।


कोरोना .....

दे दो माँ वरदान,करूँ मैं वंदन।
कोरोना हो दूर,करो अब भंजन।
हरलो माता भार,जरा सुन अर्जी।
खुश हो घर संसार,चले जो मर्जी।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

गुरुवार, 26 मार्च 2020

विज्ञात जन्मदिन

परम आदरणीय श्री गुरूदेव संजय कौशिक "विज्ञात" जी जन्मदिन की बधाई व शुभाशया के संग एक कुण्डलियाँ समर्पित...

अपनी वाणी से कभी,करे नहीं आघात।
अतुलनीय जो है सदा,हैं कवि रवि विज्ञात।
हैं कवि रवि विज्ञात,रौशनी भरते मग में।
मिले मान सम्मान, सदा ही कलयुग जग में।
कह तोषण कर जोड़,पड़े माला नित जपनी।
मिले गुरू विज्ञात,वाह रे किस्मत अपनी।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

बुधवार, 25 मार्च 2020

माता की नवरात्रि

सादर नमन
दिनाँक:- 25/03/2020
दिन:- बुधवार
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
छंद:- कज्जल छंद में एक प्रयास

आजा  दाती राह फूल।
चरणों  तेरी  न हो धूल।
राजे कर में जो त्रिशूल।
आती  है नव रात मूल।

लाली चुनरी आभ रूप।
है  लगती  मैया  अनूप।
मेरी  माता  है   स्वरूप।
बिखरी  देखो  नई  धूप।

आयी  पावन  चैत रात।
होगी  माता  मुलाकात।
दर्शन  तेरी  बड़ी  बात।
बैरी  की  हो खरी मात।

टेकूँ  नित  मैं  तुझे माथ।
बनकर  दास रहूँ सनाथ।
मिलता है आशीष साथ।
पूजा करते  सिया  नाथ।

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 10 मार्च 2020

एसो होरी तिहार मा

होरी तिहार मा...

एसो के होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो
डोकरा बबा डोकरी दाई
सबला गुलाल लगाबो।।

नई छोड़न भइय्या भउजाई
बड़का बबा अउ बड़की दाई
कका काकी दाई ददा संन
सुघर फगुवा गाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

माते सरसो के फुलवारी 
सियान मितान संग संगवारी
धरे गुलाल अबीर हाथ मा
पिचका अजब चलाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

रंग पानी के होरी तिहार
बिन पानी हे सब बेकार
जल जीवन हे ए अनमोल
पानी हमन बचाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

तोषण धनगंइहा

होरी हे

रंगों का महापर्व होली की
हार्दिक बधाई व शुभाशया
होली विशेष
हाइकु पंच समीक्षार्थ

होलिका दाह~
श्रीफल चढ़ातें है
गाँव के लोग।1।

होली परब~
रंगों से है खेलती
नन्हीं बालाएँ।2।

नील बरन~
धरती को रँगती
फागून रंग।3।

होली की धूम~
नगाड़ा थाप पर
नाचते बाल।4।

फागुवा राग~
बसंत में झूमती
आम्र मंजरी।5।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

प्रेम सद्भाव

*प्रेम सदभाव लिये,*
              *एकता संदेश दिये,*
*होली का त्योहार हमें,*
              *यही सिखलाती है।*
*रंग सराबोर करे,*
              *सुमता के राह गढ़े,*
*सतरंगी रंग सदा,*
              *पाठ ये पढ़ाती है।*
*आओ मिल हम साथी,*
              *मिलके मनाये होली,*
*बसंत बयार लिये,*
              *कोयलिया गाती है।*
*रंगीला परब भावे,*
              *मन मेरा नाचे गावे,*
*फाग की नगाड़ा अब,*
              *राग जो सुनाती है।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*
*डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.*

होरी हे

छत्तीसगढ़ी कुण्डलियाँ

आनी बानी रंग हे,
           घोर-घोर के घोर।
बइरी मन हर देख के,
           नाचे मुड़ चिभोर।
नाचे मुड़ चिभोर,
           थाप सुनके नंगारा।
दुरिहा इरषा होय,
            रहे गा भाईचारा।
रंगव सातो रंग,
            बचाके संगी पानी।
भजिया गुजिया संग,
            चुरे खइ आनी बानी।

तोषण धनगंइहा

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...