छत्तीसगढ़िहा कुण्डलियाँ
परिषद तबहे जी हमर,बनही हीरा खान।
एक दुसर ल देख के,सीखन अउ सीखान।
सीखन अउ सीखान,समय जी थोरिक देवव।
अड़हा नाविक जान,नाव ला बढ़िहा खेवव।
कह तोषण कर जोर,भाव ले मन मा गदगद।
खिलही डोहरु फूल,चढ़ै गा सीढ़ी परिषद।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
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