मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

दिनकर

🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आदरणीय संजय कौशिक "विज्ञात" जी और आदरणीया अनिता मंदिलवार "सपना"दीदी जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आपने मुझे उपनाम देने के योग्य समझा, इसके लिए बहुत बहुत आभार...💐💐💐

सारे जग के तम हरूँ,मिला बड़ा उपनाम।
धन्य धन्य विज्ञात जी,करूँ सदा हित काम।
करूँ सदा हित काम,साधना साधक जोगी।
रहूँ साहित्य दास,नित्य नव रचना होगी।
कह दिनकर कर जोड़,बनूँ नित सेवक प्यारे।
दो खुशियों के पुष्प,जगत को सौपूँ सारे।।

-तोषण कुमार चुरेन्द्र"दिनकर"

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