कज्जल छंद विधान
मात्रा भार 14-14
सूत्र
2-2-2-2-3-3
4-4-3-3
सादर नमन
छंद:- कज्जल छंद
आजा दाती राह फूल।
चरणों तेरी न हो धूल।
राजे कर में जो त्रिशूल।
आती है नव रात मूल।
लाली चुनरी आभ रूप।
है लगती मैया अनूप।
मेरी माता है स्वरूप।
बिखरी देखो नई धूप।
आयी पावन चैत रात।
होगी माता मुलाकात।
दर्शन तेरी बड़ी बात।
बैरी की हो खरी मात।
टेकूँ नित मैं तुझे माथ।
बनकर दास रहूँ सनाथ।
मिलता है आशीष साथ।
पूजा करते सिया नाथ।
कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.
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