शनिवार, 24 मार्च 2018

दरार

मिटे दरार--
बँधे एक्य सूत्र से
नवरात्रि में.

हुए दरार--
भाई भाई के मध्य
बढ़ती दूरी.

बँटता जग
दरारों के दरम्याँ
समेटो कोई---

कैसे खिलता
गुलाब सीमा पर
बाधा दरार---

रहें मिलके--
भर दें दरार को
प्रेम रेत से.

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव

आश

करदो पूरी आश,सुनकर पुकार मा सती..
हो कलेश सब नाश,सब जग जीव निहाल हो...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

तेरा लाल

माता मुझको थाम लो,हूँ मैं तेरा लाल..
मिल जाये आशीष जो,क्या मारेगा काल...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

नवरात के दोहा

*नवरात के दोहा*

*लाली चुनरी साज के,माता अड़बड़ भाय!*
*दरसन करके भाग सब,अपन अपन सहुँराय!!*

*सुनले तँय गोहार वो,माँथ नवावँव आज!*
*भरे सभा मा आज तँय,मोरो रखदे लाज!!*

*लइका अबोध जानके,किरपा करदे आज!*
*बाधा मोरो टार के,पूरन करदे काज!!*

*दुरगा दाई के चरन,सबझन माँथ नँवाव!*
*जस पचरा सेवा भजन,मिल सब गाव बजाव!!*

*झूमव नाचव आज सब,परब हवय नवरात!*
*पंडा भजन सुनात हे,सेउक ढोल बजात!!*

*दोहा तोषण के सुनव,करलव सुंदर गान!*
*मिल देवव आशीष सब,पावँव सबके मान!!*

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
arhkepagakalagi.blogspot.com

बुधवार, 21 मार्च 2018

मुक्तक

टुटे दिल सभी को दिखाना नहीं
अपनों से कभी भी छुपाना नही
कोई ठोकर मारे कोई दे सहारा
पर कभी किसी को रुलाना नहीं

हर तरफ उसके प्यार का एहसास करता हूँ मैं
खुशनुमा वो हरपल को मधुमास करता हूँ मैं
कब आ जाये न जाने वो लौटकर मेरी बाहों में
आने वाले हर उन पलों को खासम खास करता हूँ मैं

साथ जो न मिल पाये वो किनारे हैं हम
दूर रहकर भी इक दुजे के सहारे हैं हम
करते रहेंगे यूँ ही अब दीदार दूर से हम
चाँद को बस देखता जैसे सितारे है हम

मिलके आपसे  बिछड़ना हमें अच्छा नहीं लगता
यूँ छुपकर गुनाह करना हमें अच्छा नहीं लगता
आ जाएँगे हम किसी दिन दुनियाँ की निगाह में
सोच सोच कर ये पल हमें अच्छा नहीं लगता.

ये मोहब्बत मेरी मुझे बदनाम कर गई.
खुद  अपने नाम को गुमनाम कर गई.
चाहते थे हम तुम्हें हर पल खुश देखना,
नसीबा गम ए जुदाई सरेआम कर गई.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

नवरात्रि

नवरात्रि विशेष

मातृ पूजन
नवजोत जलायें
नवरात्रि में....

जय माता की
जयकारा लगायें
शेरावाली की....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 3 मार्च 2018

आओ मनायें होली

*आओ मनायें होली*

इन्द्रधनुषी रंगों के संग मनायें आओ होली
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली

बरसाने में राधा के संग
होली खेले नंदलाल
रंग बिरंगी छटा बिखेरे
मिलके अबीर गुलाल

रंगने निकले आज नटवर को ललिता की टोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

पीली सरसों की रंग लेकर
होती रहे रंगीली बौछार
स्नेह भरी पिचकारी से
छलकता रहे सिर्फ प्यार

सतरंगी रंगों से मिलकर बनते आज रंगोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

राम लखन भरत शत्रुघन
उड़ावै रंग अबीर गुलाल
नल नील सुग्रीव जामवंत
लाल हनुमत करे कमाल

कृपा है उस ईश्वर की जो भरते सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली

मिटे भ्रष्टाचार देश की
मेरे जहान में शांति रहे
सूरज बने फैलाता जग में
हरपल अपनी कांति रहे

नहीं फटे कहीं गोला बारुद चले न अब कही गोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

खुशनुमा हो जीवन सबका
रंगों भरा आसमान हो
लक्ष्य हो पूर्ण सभी का
सफलता का सोपान हो

मंगलमयी कामनाओं से भरी हो सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
९८२६७००३१९,,९६१७५८९६६७

तीन रंग के रंग मा...

रंग दे आज बिधाता मोला तीन रंग के रंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा...

केसरिया के रंग मा रंग के
साहस सदा भरे रहय
बइरी मन ला मार गिरावँव
छाती मोर तने रहय

बोलँव भारत माता के जय भुजा डोलय तरंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा...

शांति के संदेस देवंव
सादा रंग मा रंगे रहँव
चलत रहँव सतमारग मा
हरिशचंद जस सते कहँव

झन झपावय कोनों मनखे भ्रष्टचार के सुरंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

भारत के सोनहा भुंइया
हरा-भरा खुशहाल रहय
छत्तीसगढ़ के पबरित माटी
धान के कटोरा कहय

सुख समृद्धि पावय सब नाचय गावय उमंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

ये तीन रंग के मान बर
कतको बीर बलिदानी हे
जनम जनम ले रही अमर
अइसन एखर कहानी हे

साहस सत समृद्धि खातिर जोस सेना के दबंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

तिरंगा हवय हमर संगी हो
सब्बो रंग ले बढ़िहा
मिलके तोषण के संग मा
रंग लव छत्तीसगढ़िहा

आवव नाचव गावव लगावव रंग ले रंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९८२६७००३१९,
९६१७५८९६६७

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सेवा के मेवा

हाइकु
सुत्र ५/७/५

सेवा के मेवा
   मिलही  एकदिन
      धीरज  धर.....

मोर  करम
   हवय  बईमान
      देवय  धोखा

ददा  के  हाथ
   किरपा  बरसय
      सकेलो  सब...

पइसा  ऱुख
   पनपे  भष्टाचार
      मुड़  के  पीरा...

पानी  लावय
   बंगाला  के  चटनी
        बड़  सुहाय...

बिदा  बेटी  के
  ददा  बड़  रोवय
      दाई  सुसके

मोर  मोहना
   जाबे  कहाँ  बाँचके
       रँगहूँ  तोला...

सुग्घर गोठ
   छत्तीसगढ़िहा के
      लगथे मीठ...

रंग बे मोला
   नेवता देवत हों
      आजबे तैहा...

मिलके दुनों
   रचाबो रंग रास
      होरी तिहार...

अपन गोठ
    बढ़िहा जमत हे
        जोड़ी हमर...

कब होही दरसन

*कब होही तोर दरसन*

कब होही तोर दरसन
होबे कब तैहा परसन
मया ल तोरले पायबर
होवत हे मोला अड़चन

होही कब मोर आस पूरा
जिनगी तोर बिन हे अधूरा
मर जहूँ तइसे लगथे मोला
धकले करथे मोर जीवरा

कब मनाबो जी हम होरी
बँधाही कब मया के डोरी
रस्दा ल तोर देखत रहिथों
चंदा ल देखय जस चकोरी

तै मोर राधा बनवारी मैं
बिन रंग के पिचरारी मैं
हावस चंदा कस दूरिहा
हँव जस अँधियारी मैं

सपनाथंव तोला रात कून
दया नइ लागय थोरकून
काबर तै कलपावत हस
बात मान लेतेस मोर सून

तडपत हँव तोर मया बर
लेवस नइ तैह मोर खबर
का अइसन बात होगे हे
अब नइ धर सकंव सबर

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९६१७५८९६६७
९८२६७००३१९

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

धरती वंदना

धरती दाई तोर अबोध लइका कइसे करँव मँय बखान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ

भारत माता के दुलौरिन बेटी छत्तीसगढ़ तँय कहावय
अरपा पैरी महानदी के धार ह सुग्घर बोहावय

तोर अछरा के छंइहा म दाई लहरावय धान ओ

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

बीर नरायन गैंदसिह नायक तोरेच सेवा बजाइन हे

मान तोर राखेबर दाई अपने प्रान गँवाइन हे

ए भुंइया कोन्हा कोन्हा लागय सोनहा खान ओ

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

शबरी के जूठा बोईर ल खाइस राम ह जिहा आके

धन्य होगे हमर भुंइया नवधा भगति ल पाके

गंगा मंइया तेलीन सत्ती सबके महिमा गान ओ

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोर कोरा लागे हमर बर संऊहत तीरथ धाम असन
तोर मान रखेबर दाई करबोन जुरमिल के जतन

आही बेरा पाछू नइ घूंचन छोंड़ देबो हम प्रान ओ...

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

धूल मिट्टी पत्थर

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 10)*
          *दिनांक 21/02/2018*
                 *दिन - बुधवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *धूल*
                       *मिट्टी*
                      *पत्थर*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

धूल

गोधूली बेला
गाय का आगमन
उड़ते धूल ...

मिट्टी

महके मिट्टी
बरसती बूंदो से
अंकुर बीज...

पत्थर

पूजे जहान
पत्थर की मूरत
आस्था प्रतीक....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

समझदारी

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 09)*
          *दिनांक 19/02/2018*
                 *दिन - सोमवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *कली*
                       *पुष्प*
                      *भ्रमर*
                      *बसन्त*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

समझदारी
खिलने दे कली को
जग महके....

विकल पुष्प
काँटो के दायरें में
मन द्रवित....

भ्रमर लक्ष
मंडराते करीब
सुता परेशाँ...

बसंत राग
कोयल गाती कैसे?
बनके कैदी....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

शिव स्तुति

पहिने बाघंबर साला गलेयन में मुंड के माला...
आसन लगाए तँय पहाड़ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला..

मांथे मा चंदा सोहे गंगा मइया साथ मा
एक हाथ तिरशुल सोहे डमरु धरे हाथ मा
नंदी के तैहा चढ़इया भृंगी हे सेवा बजइया...
परबतिया हे तोर साथ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला...

अवघढ़िया तोला कहिथे,बम भंगिया तोला कहिथे
साँप डेढ़ू बिचछी कुच्छी सब संग मा तोर रहिथे
महादेव तैहा कहैया किरपा तै सब पे करइया
करदे तै किरपा के बौछार ला

तोर तीर आएंव भोला सुनले ले होबार ला

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

चली बयार

*" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "*
💐💐💐💐💐💐💐

*09 फरवरी आज के हाइकु का विषय :-*
       *बसंत*
       *बयार*
       *रंग*
       *सरसों*
       *गुलाब*

    *चयनित हाइकु*

*01. गुलाब रोया*
*शहीद से लिपट*
*सुपुत्र खोया ।*

*✍🏻स्नेहलता वर्मा*

*02. परसा फूले*
*फागुन रंग खिले*
*वन झाड़ में ।*

*✍🏻नरेश कुमार जगत*

*03.चली बयार*
*लिये फागुन राग*
*जग रंगोली ।*

*✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र*

*अतिरिक्त : ----*

*01.रंग-बिरंगे*
*प्रसूनों से सज के*
*प्रकृति झूमे ।*

*✍🏻सविता बरई*

💐💐💐💐💐

*विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी*
*संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

सात घंटे

सात घंटे

वो  तेरे सात घंटों का साथ
पल - पल  हर पल है खास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

रहता  है  तेरी बातों में नशा
भा  जाती  है  तेरी हर अदा
अकेले में  रहती  है साथ तू
रोम -रोम में है तेरा एहसास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

तुम मुझसे रुठती मैं तुझसे
दोनों  का यूं मानना मनाना
कभी होंगे न जिंदगी में हम
कभी  भी  कहीं  भी उदास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

हमारा रिश्ता  बरसो पुराना
भूला न  पाएगा  ये जमाना
बारहमासी  प्रेम   है अपनी
बनी रहेगी ये सदा मधुमास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

मर  भी जाऊंगा जो मैं अगर
इश्क मेरा रहेगा हमेशा अमर
तुझको पाने को मेरा ये दिल
जन्म जनम लेता रहेगा साँस
दूरी  है  मुझसे गम नही कोई
रहती  तू सदा  दिल के पास

तोषण कुमार चुरेन्द्र

तेरे दर पे

*तेरे  दर  पे  आकर  फरियाद  करता  हूँ.*
*हर  घड़ी  हर  पल  तुझे  याद  करता हूँ.*
*सुनना या ना सुनना  मेरी  मर्जी  है  तेरी,*
*आसरा से जिंदगी खुद आबाद करता हूँ.*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७*

माँ की सुरत

माँ की सूरत
आईना बेटियों की
नेक नियत...

तेरी ही छवि
दे माँ नव जीवन
बनूँगी रवि...

बनूँ तूफान
मुश्किलों से मैं लड़ूँ
हारे चट्टान...

बिटिया प्यारी
सीता सावित्री मनु
राज दुलारी...

शिवा की माता
जिंदादिली जीजा की
भाग्य निर्माता...

चलूँ उड़ते
स्वच्छंद अंबर पे
मन झूमते...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

ज्ञान प्रदाता

ताँका

ज्ञान प्रदाता
संवारता जीवन
राष्ट्र निर्माता
जगमगाता जग
सुदृढ़ पग - पग

🚶🚶🚶🚶

ताँका

मेरा  जीवन
उलझाता  समय
है  आजीवन
मंगल  की  तलाश
है  जगत  उदास

हाइकु

बरसे आग
क्रोधित दिनकर
अजब राग

बहे सरिता
करने उपकार
धरा पुनिता....

सींचती धरा
आलोकित चमन
हो हरा भरा...

हो अग्रसर
चरैवेति कामना
झरना झर...

मिटाती प्यास
अंतरात्मा संतुष्ट
सबकी आस...

भूमि पावन
जन गण हर्षित
मनभावन

जगमगाया
दीप राजिम कुंभ
मन लुभाया...

श्रद्धालु झुमे
पुलकित हृदय
करते जय...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयारें
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगीली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

बुधवार, 17 जनवरी 2018

तरु है दादा

१७-१-१७
का हाइकु

तरु  है  दादा
परिवार  का  मूल
नेक  इरादा

जीवन  मेरा
पिता  का  आशीर्वाद
छाँव  का  घेरा

मूरत  माँ  की
ममता  का  आँचल
तीरथ  झाँकी

भातृ  का  स्नेह
दुलार  भउजी  की
कंचन  मेह

बहन  की  राखी
स्नेह  भरी  रसरी
उड़ती  पाखी

तोषण कुमार चुरेन्द्र
https://arhkepagakalagi.blogspot.in/?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C1582631584

सोमवार, 15 जनवरी 2018

मुक्त मुक्तक

*तोषण कुमार चुरेन्द्र की कलम से*

[1/7, 2:09 AM] Toshan Kumar Churendra:

रब कहता है

मैं वो करीगर हूं पत्थर को भगवान बना देता हूं
सुनो अबोध बालक को इंसान बना देता हूं
करले जरा मेरी पहचान रे तोषण
सारे जग में तुम सबकी पहचान बना देता हूं

[1/7, 2:13 AM] Toshan Kumar Churendra:

करले मेरी भक्ति तुझे मालामाल कर दूंगा
सोंचा न हेगा तु जग में निहाल कर दूंगा
एक मैं ही हूं सबका साथी तोषण
गरीब को अमीर अमीर को कंगाल कर दूंगा

[1/7, 2:18 AM] Toshan Kumar Churendra:

रहमत तेरी मुझ पर दाता हर कदम बरसता रहे
दुखो का न हो सामना जीवन सदा सरसता रहे
मिलकर बांटूं तेरी गाथा करता रहूं सिर्फ तेरा ध्यान
सब में हे प्रेम भाईचारा विश्व में सदा समरसता रहे

[1/7, 2:25 AM] Toshan Kumar Churendra:

मंच से हमारे हे विप्रवर आपको सादर बिदाई है
आगत का हम करेंगे स्वागत यही आदर पहुनाई है
मधुर मधुर सी तान से  पल्वित धरा हमारा है
सुन दर्शक दीर्घा स्रोता समाज ने जोरदार तालियाँ बजाई है

[1/7, 2:33 AM] Toshan Kumar Churendra:

हरी की हरियाली देता संतो
राम नाम गुन गाने का
भक्त और भगवान को एक दुसरे से मिलाने का
पीली आपको इशारा करेगी पांच मिनच है शेष
छा जाए लालिमा मंच में समझो जाना अपना देश

[1/7, 2:37 AM] Toshan Kumar Churendra:

जिनगीच के राहत ले लकर लकर तै करबे
लकर लकर तै झन कर संगी एक दिन तै हफरबे
हफरे के पहिली करले जोरा गाले तै सिया राम ल
संवरे नही जियत ले संगी मरे के बाद संवरबे

[1/7, 2:40 AM] Toshan Kumar Churendra:

जियत ले हे तोर मोर कोनो नइ देवय साथ गा
रुपिया पैसा महल अटारी जावय नइ तो साथ गा
राम रमैय्या जपले तैहा मन में धरले ध्यान जी
पार लगाही दसरथ नंदन मोर सिया पति रघुनाथ गा

[1/7, 2:50 AM] Toshan Kumar Churendra:

ए तन माटी के खिलौना
पानी परे घुर जाही जी
रुपिया पैसा धन डोगानी
काम घलो नइ आही जी
जियत भरके संगी साथी
मरेम पीताम्बर ओढ़ाही जी
रापा कुदारी म गड्ढा करके
भुइया म तोला गडियाही
नइ खवाय तोला  तात पेज
दसकरम म भोग लगाही जी
तोर कमइ ल फुदर फुदर के
नंगत मजा उड़ाही जी
राम नाम सुमरन करले संगी
इही काम तोर आही जी
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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क्यों हो...

Tum harpal hamesha yad  aati kyo ho
Khushbu bnke sanso me smati kyo ho
Aankho me jhalkta tumhara chehra
Tanhai me aake harpal  satati kyo ho

पगला बइहा

पगला बइहा बना डरे तै
मया के मोहनी खवाके
तोरेच सुरता आवत रहिथे
सुख चैन ल बिसराके
सुहावय न कोनों संगी साथी
खाय पीये ल भावय नहीं
रतिहा मोला जगाथस पगली
रही रही सपना म तै आके

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

रविवार, 17 दिसंबर 2017

जब जब तोर मया के सुरता

जब जब तोर मया के सुरता
आथे गोरी मोला सावन मा
आँखी ले झर झर आँसू झरथे
मोर हिरदे के आँगन मा....

बइहा बनके किंजरत रहिथों
बइरी डोंगरी पहाड़ मा
सुध बुध मोर कही राहय नहीं
सजनी रे तोर प्यार मा
कोन जनी रा रोग हमाँगे
हरिहर हरिहर यौवन मा
आँखी ले झर झर............१

संगी जहुरिया मारे ताना
रोयली करे ठिठोली
झन तरसाना उढ़ाके आजा
सुन लेतेंव तोर बोली
तन हा भुंजाके राखर होगे
तोर मया के दावन मा
आँखी ले झर झर.......... २

मोर मया ल समझस नहीं
मोला गजब सताथस तँय
मुच मुच मुच मुच हाँसके मोला
सापू रतिहा रोवाथस तँय
तोषण ल बिसार के पगली
मन लगाए खिलावन मा
आँखी ले झर झर.........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

सोमवार, 20 नवंबर 2017

दिन ढलते

आँसू कहते
कब आओगे तुम
दिन ढलते.....

निहारुँ राह
है मन आनंदित
प्रेम की चाह...

हो आगमन
चकवा निहारती
स्वाती की बूँद....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शभकामना

एकता शक्ति
पूरे हो अरमान
शुभकामना

ओस की बूँदे
टिमटिमाते तारे
धरा अम्बर...

कर्म है तेरा
न हो इच्छा फल की
कृपा ईश की...

खेलते बच्चे
धरना में शिक्षक
तम भविष्य

माँ की डाँट
नसीब में भी नही
रुठी किस्मत.. .

माँ की यादें
है अंतरात्मा बसी
भीगी पलकें

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 19 नवंबर 2017

अपना गाँव

तरु की छाँव
खेलता बचपन
अपना गाँव

मिट्टी चंदन
निखरित मस्तिष्क
कोटि वंदन

बहे सरिता
है धरा पल्लवित
मग पुनिता

कुँजती पिक
लगे मनभावन
देती सीख

कृषक झुमे
लहलहाते धान
माथा चुमे

पुष्प पलाश
देती नव चैतन्य
पूरी तलाश

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

पिया मिलन

पिया मिलन
     निहारती पलकें
             प्रेम अगन

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दिले अरमान को...

बताएँ क्या हम अपनी दिल की दास्तान को
प्यासी धरती देखे  जैसे ऊपर आसमान को
आरजू है बस  उनसे आखिरी मुलाकात की
लगे न नजर किसी की मेरे दिले अरमान को....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बनें महान


संकल त्रय
   सप्तविंशति पुष्प
         मंगलमय

दर बदर
है चहल - पहल
       चार पहर

करें सम्मान
होकर आगाहित
       बनें महान

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

दाई के कोरा

दाई के कोरा
हे धान के कटोरा
तिहार पोरा...

सोहय धान
छत्तीसगढ़हीन
बेटा किसान...

कौशल राज
ननिहाल राम के
नाचव आज...

नवा अंजोर
जगमगात गढ़
माते हिलोर...

होके मगन
जुरमिल नाचव
झुमे गगन...

•तोषण कुमार चुरेन्द्र•

तोषण कुमार

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस

१ नवंबर २०००
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
पर हाइकु

छत्तीसगढ़
है स्थापना दिवस
सतत बढ़...

तरक्की करे
खुशहाल प्रदेश
उमंग भरे...

मनोकामना
मेरा छत्तीसगढ़
करे साधना...

सुवा करमा
करे गौरवान्वित
तेरी महिमा...

माथ नवाएँ
मंगलाचार करें
महिमा गाएँ...

पावन धाम
है दक्षिण कौशल
निर्मल ग्राम...

श्रृंगी आश्रम
बड़ा मनभावन
शबरी धाम...

•तोषण कुमार चुरेन्द्र •

गुरुवार, 7 सितंबर 2017

लोटा

पीतल-काँसा छोड़ के,
                        ताँबा लोटा भाय।
अमरित कस पानी लगय,
                  तन-मन सब हरियाय।।

बिना धुरी लोटा असन,
                     झन बनिहव इंसान।
येती-ओती झन घुमर,
                  नइ मिलही  पहिचान।।

मत बन रहव गिलास सब,
                        लोटा बने रहाव।
प्यास बुझावव चार के,
                 जिनगी सुफल बनाव।।

बुधवार, 6 सितंबर 2017

चल चला चल

मन में हो विश्वास अगर।
मुश्किल नहीं कोई  डगर।
चल चला चल आगे चल,
खड़ा लक्ष्य तेरे पथ पर।।

लोटा


लोटा भर पानी धरव,चलव शिवा के धाम।

माथ नवावव आज सब,लेवव शंभू नाम।।


 लोटा मा पानी धरव,सगा कभू घर आय।

कुरसी मा बइठारके,पूछव पानी चाय।।


चोर मोर लोटा धरय,भागय पल्ला छोड़।

आ जावय जब हाथ मा,देहँव मुड़ ला फोड़।।

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...