सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

बड़े दिनों बाद

बड़े दिनों बाद...

बड़े दिनों बाद एक बात दिल में आई है।
अपनों के भीड़ में भी कितनी तन्हाई है।

गुजारा हुआ हर पल आज कहता है मुझसे,
अब तेरी वफा में न जाने ये कैसी रूसवाई है।

बहती ये हवाएँ भी सदाएँ देती है हमको,
पहले की वफा हँस कर फिर क्यूँ बेवफाई है।

लौटकर न आना कभी जा अब दूर कहीं,
मेरे दिल की गली से सब दिन की बिदाई है।

ये फिजायें ये गुलशन भी बातें नहीं करते,
कहते ही रहते हमें ये "धनगंइहा" हरजाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
ईकाई डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

आभार

कोटि कोटि आभार

जनता हो धनगाँव के,देहव मया दुलार।
हिरदे ले काहत हवँव,तुम सबला आभार।।
तुम सबला आभार, चुने जी हावव मुखिया।
रखहूँ सबके मान,रहय जे कौनों दुखिया।।
हँव तोषण सरपंच,बनाहूँ सबके बनता।
सेवा रहिही पोठ,संग जब देवय जनता।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र'धनगंइहा'(कवि)
नवनिर्वाचित सरपंच, ग्राम पंचायत धनगाँव
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

पेट

*कुण्डलियाँ*

_*पेट*_

_*भरता जिसका पेट है,रहे वही है मौन।*_
_*दीन दुखी लाचार को, पुछे भला अब कौन।।*_
_*पुछे भला अब कौन,काम जब बन है जाता।*_
_*स्वार्थ का संसार,कौन है किसको भाता।।*_
_*रहे कहाँ से ध्यान,नहीं मन अब कुछ करता।*_
_*चंगा रहे शरीर,पेट है जब जब भरता।।*_

_*भूखा रहकर कब तलक,कैसे भजन सुनाय।*_
_*मुख से निकले राम जी,दिल से निकले हाय।।*_
_*दिल से निकले हाय,पेट जब भूखो मरता।*_
_*होकर के मजबूर,काम है फिर भी करता।।*_
_*दिन गये है बीत,खाय जो पत्ता सूखा।*_
_*रहकर सब यूँ मौन,सहो जी बनकर भूखा।*_

_*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*_

चुनाव माहोल

माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।


जेन मिलथे सब काहत हे,
तुहीच ल देबोन वोट हम।
तोला रहिबोन सब चिनके,
फेर झिन करबे नोट कम।
जनता मन के चारो कोती,
हाथ दुनों अभी हरियाए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।

आथे जब गाँव मा प्रत्याशी,
जनता ल गजब रिझाए बर।
देखा के अपन चुनाव चिनहा,
लगथे गा सुग्घर बताए बर।
बिना नोट के वोट नंइ मिले,
भीड़ लोगन नेता ल चेताए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।

रीत हे देखव याहा कइसे ,
दानी ह लालची होवत हे।
अपन मत के दान करेबर,
ये पइसा खातिर रोवत हे।
गाँव समाज ल छोड़ सब,
अपनेच सुवारथ सधाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।

गाँव के बढ़िहा विकास करय,
अइसन मुखिया बनावव जी।
मिलजुल के मोर संगी साथी,
गाँव ल सरग सजावव जी।
सच्चा ल चुनव अच्छा चुनव,
अतरी 'धनगंइहा' सोरियाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।
माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।


तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
२०/०१/२०२०
९५७५०७०६८९

बुधवार, 15 जनवरी 2020

तुमने जो अगर(परमानंद प्रकाश)

....................................................

तुमने जो अगर दिल से पुकारा नहीं होता 
तुम आज मेरे तो, मै तुम्हारा नहीं होता

मै मर ही गया था, तेरे इस जुल्म-ओ- सितम से
जो रब का अगर मेरे इशारा नहीं होता

जिस रात मेरे ख्वाब मे आती नहीं है तू 
उस रोज मेरे दिन का गुजारा नहीं होता

हाँ साँथ मेरे तू जो चले राह में तो ठीक 
बिन तेरे मुझे चलना गवारा नही होता

"परमा" को तेरा प्यार अगर होता जो हासिल
तो गर्दिशो मे मेरा सितारा नही होता

- परमानंद प्रकाश,गुरुर,छत्तीसगढ

सोमवार, 13 जनवरी 2020

जाबो मतदान करे

घनाक्षरी

जाबो मतदान करे,हक ये हमर हरे,
मिले हावे मोका येला, कभु नी गंवाना हे।

चुनबो अपन नेता,सबके हावै चहेता
सुनो मोर भैय्या भौजी,विहीला जिताना हे।

गाँव के बिकास करे,दीन दुख दूर करे,
फले फूले गाँव सारी,सुग्घर बनाना हे।

सुनो सब नर नारी,मिले हावै अब पारी,
देश अउ समाज ला,सुदृढ़ सजाना हे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष
मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

विचार

*किसी के चरित्र पर कीचड़ उछालने से पहले अपने निगेहबान की निगरानी रखें कि स्वयं कहाँ है। पक्षी हो या विपक्षी मनुष्य के अंतर्निहित गुण और अवगुण होना स्वभाविक है। लेकिन गुण की अधिकता के कारण अवगुण का निशान छिप जाता है शायद यह ज्ञान कीचड़ उछालने वाले के समझ से परे लगता है। कर भी क्या सकते है।कहा गया है कि*
_*" फुलै फरै ना बेत,जलधि जो बरसहि सुधा।*_
_*मुरख जान ना चेत,मिले जो गुरु बिरंचि सम।।"*_

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

उम्मीदवार के ब्यथा

*उम्मीदवार के ब्यथा*

सऊँख मोरो जी चर्राय राहय
जाके फारम फटले भरदेंव।
लड़हूँ महूँ चुनाव अब कहिके 
गाँव भर मा ढिंढोरा करदेंव।।

बनेबर बर तो मैं बनगे हावँव
सरपंच पद उम्मीदवार मँय।
आगू पाछू मोर कोनों नंइ घूमय
कइसे के करिहँव परचार मँय।।

बीजा छीतेहँव धनहा डोली मा
पानी ला घलोक देवइय्या नंइहे।
लेना जी लेना सबोझन कहिथे
संग में रेंगइय्या कोनो नंइहे।।

देख के कहिथँव ये दूनियादारी
एक बात तो अब समझ आथे।
चलथे जी ओकर आगू पीछू मा
जेन हर पाँवपूट चेपटी पियाथे।।

मँय हर रहिगेंव सिधवा सादा
दाँव पेंच मोला आवय नहीं।
सुनेंव वो मनखे कभू नंइ जीते
जेन कभू पियाय खवावय नहीं।।


मुड़ी ह फिजगेहे पानी मा तब
सुरा ला का अब  डरराना हे।
होही जइसन राम जी राखय
पाँव नंइ चिटको हटाना हे।।

कहिथे तोषन सुनगा भैय्या
डर के आघू मा ही जीत हे।
नहीं काहत हे बहिरी ले जेन
भीतरे भीतर ले तोर मीत हे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
9575070689

मंगलवार, 7 जनवरी 2020

बतिया

अलंकार की जानकारी

एक प्रयोग और देखें (सफल निष्फल के निर्णायक आप) 

*श्लेष अलंकार:-*
*एक शब्द में एक से अधिक अर्थ जुड़े हों (जहाँ कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो किंतु प्रसंग भेद में उसके अर्थ अलग-अलग निकलते हों वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है।*
*1 काँसा* 
*2 भाव*

*मानवीयकरण अलंकार:-* 
*अमानव ( प्रकृति, पशु-पक्षी व निर्जीव पदार्थ में मानवीय गुणों का आरोपण करना मानवीयकरण अलंकार कहलाता है* जैसे:- 
*काँसा मूरत रो रही*

*विप्सा अलंकार;-* 
*मनोभावों को प्रकट करने के लिए शब्द को दुहराना (विप्सा-दुहराना)* जैसे 
*छि: छि: -- तिरस्कृत , घृणा योग्य*

'कौशिक' काँसा हिय व्यथा, रोया काँसा जातु।
काँसा मूरत रो रही, भिक्षु-पात्र, लघु, धातु ।
भिक्षु-पात्र, लघु, धातु, भाव बिन पीछे रहते।
कौन समझता दर्द, सुनाकर किसको कहते॥
छि: छि: उठता प्रश्न, बने फिर कैसे लौकिक। 
भिक्षु-दान, लघु, धातु, विवाहों में क्यों 'कौशिक' ॥ 
*संजय कौशिक 'विज्ञात'*

शब्द- अर्थ 

*'जातु' अवयव* (कदाचित्) कभी 
काँसा - कनिष्ठ, भिक्षुक पात्र, धातु 
भाव- भावना/ मूल्य/ भाव (गूढ़ विचार) 
भिक्षु - भिखारी 
कनिष्ठ- लघु

चरण 11, लघु के बाद यति 
लघु का अर्थ कनिष्ठ: 
बहन के फेरों के बाद जब बहन पहली बार दुल्हन बन ससुराल जाती है तब कनिष्ठ महत्वपूर्ण हो जाता है उसे साथ भेजा जाता है।

*धातु-काँसा* लड़की के विवाह के समय दान दिया जाने वाला काँसा का बर्तन खाण्ड कटोरा कहलाता है। (इसके पीछे की परंपरा का अर्थ भिन्न भिन्न स्थान पर भिन्न हो सकता है और कुछ स्थान पर यह परंपरा हो ही ना ऐसा भी हो सकता है) उत्तर भारत में ऐसा बहुतायात देखने में आता है। जिसका अर्थ यह माना जाता है कि आज से हम दोनों परिवार इस कटोरे की तरह एक हुए और हमारे संबंध इतने ही मधुर रहेंगे जितनी इसमें देसी घी और खण्ड हैं 
प्रश्न यही कि काँसा प्रयोग मृत प्रायः हो चुका है ऐसे में इसकी शुद्धता और आवश्यकता परम्पराओं में जीवित है जहाँ काँसा का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है।

*2 भाव* 
धातु ... भाव मूल्य (सोने सी महंगी न हो)
लघु .... भाव विचार (समानता का भाव न हो)
भिक्षु .... भाव दान का (दानवीर के दान करने के  भाव न हों) 

इनके बिना पीछे रहते हैं

देखा बिकता वोट

सोमवार, 16 दिसंबर 2019

अंडा

समीक्षा मे...

_*कुण्डलियाँ*_

_*कैसी ये सरकार है,देता हाथ मड़ोड़।*_
_*पोषकता के नाम पर,गजब निकाला तोड़।।*_
_*गजब निकाला तोड़,गुरू  खिलवाते अंडा।*_
_*कह तोषन कर जोड़,नही बरसाओ डंडा।।*_
_*करते नित जो भोग,और होगी मति वैसी।*_
_*रोध करें पुर जोर,नियम है कैसी कैसी।।*_
 
_*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*_
_*डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़*_

कुमकुम वेणी

●●●●●कलम की सुगंध छंदशाला●●●●●
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            कुण्डलियाँ शतकवीर हेतु
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              दिनांक - 16.12.19
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              कुण्डलियाँ (1) 
                विषय-वेणी

लाती मन मुस्कान ये,देख अजब श्रृंगार।।
वेणी है अभिन्न अंग,शोभित होती नार।
शोभित होती नार,खिले गजरा इठलाती।
मन को भाती साज,रूप यौवन मधुमाती।।
कह तोषन कविराज,शाम या पवन प्रभाती।
वेणी कैसी साज,सोच है हिय मे लाती ।।
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              कुण्डलियाँ (2) 
              विषय-कुमकुम

कुमकुम से ही शान है,माने नारी आज।
शोभित नारी जिंदगी,नारी का है ताज।।
नारी का है ताज,मान है जग में पाता।
रहे सदा जो साथ,बलम से निर्मल नाता।।
कह तोषन कविराज,रहो कभी नहीं गुमसुम।
हे भारत की नार,माँथ सिरजाओ कुमकुम।।
★★★★★★★★★★★★★★★★
             रचनाकार का नाम
      तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
    डौंडी लोहारा बालोद, छत्तीसगढ़

वोट

माँगत माँगत बीतगे,मोर सुबे ले शाम।
वोट मिले मोला कहीं,कर लेहूँ आराम।।
कर लेहूँ आराम,पाँव बड़ मोर पिरागे।
खसकत हावे नोट,मोर पनही घलो घिसागे।।
मिलही कतका वोट,गुनँव मैं जागत जागत।
रेगँव खोरे खोर,वोट मै माँगत माँगत।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़

वेणी कुमकुम


*वेणी*
अधोभाग में झूमती,पृष्ठभाग बन नाग।
वेणी तेरी हर छटा,गाती फगुवा राग।
गाती फगुवा राग,नगाड़ा हिवड़ा बाजे।
नागिन सम इठलाय,संग नित गजरा साजे।
कह तोषन कर जोरि,साध कोई नवी सधो।
नयनन भी हरषाय,देख वेणी भाग अधो।।

*कुमकुम*
कुमकुम भाग्य नार की,बाग पुष्प महकाय।
चुटकी भर सिन्दूर से,जीवन है सिरजाय।।
जीवन है सिरजाय,रही है सदा सुहागिन।
जिनके रहे न माथ,नार ये बड़ी अभागिन।।
जीवन का श्रृंगार, कभी रखे नहीं गुमसुम।
है सजनी का प्यार,जगाती भाग्य कुमकुम।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
५:३५अपरान्ह मंगलवार १७/१२/१९

माथ पकड़ रोता रहा


*-:तोषन के दोहे पंच:-*


माथ पकड़ रोता रहा, बदरा देख किसान।

हुई मिजाई है नहीं, पड़ा धान खलिहान।।१।।


टिपटिप करती ही रही, देखो आधी रात।

बिन दुल्हा जस है लगे, बिन मौसम बरसात।।२।।


ध्यान नहीं दिन रात की , घड़ी घड़ी आँसू धार।

मन आया तो हँस लिये, ये मेघा कचनार।।३।।


पड़े समय की मार जब, मरते जात किसान।

बिन मौसम बरसात ये, कैसा ये दिनमान।।४।।


मिट्टी में है मिल गई, देखे सपने सार।

जीना मरना क्या कहें, है किसान लाचार।।५।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 15 दिसंबर 2019

दान

प्रदत्त विधा:- घनाक्षरी
विषय   :- दान
दिनांक:- 15/12/19 रविवार
★★★★★★★★★★★★★★
गाथा दान के हे बड़े,छोटे बड़े सब करे,
बड़े बड़े ऋषि मुनि,करते बखान है।

दानी राजा हरिश्चंद्र,तज दिये राजपाठ,
दान का प्रमाण दिया,जाने ये जहान है।

कबूतर प्राण खातिर,राजा शिवि माँस त्यागे,
दिया सीख मानवता,गाते जो पुराण है।।

दान करो मिल सब,अर्थ कर्म ज्ञान सेवा,
महिमा दानवीरों की,सबसे महान है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

समय


*सुधारोपरांत सादर समीक्षार्थ*

विधा दोहा
विषय समय
दिनांक १६/१२/१९
दिन सोमवार
★★★★★★★★★★★★★★
समय कभी रुकता नहीं,नहीं कहीं है ठौर।
गाती कोयल जान कर,झूमे अमिया बौर।।१।।

समय देख कर ही रखें ,एक एक पग फूँक।
आएगा यमराज जब,हो जाएगा मूक।।२।।

समय बड़ा बलवान है, करें समय में काम।
समय चाल को जान कर ,मत कर तू आराम।।३।।

समय एक सा है नहीं,सबको नाच नचाय।
राजा दानी कर्ण भी,इसका पार न पाय।।४।।

नहीं समय पर बस यहाँ, गर्व न कर इंसान।
मिट जानी है जिन्दगी, चलना है शमशान।।५।।
★★★★★★★★★★★★★★
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सबले बढि़हा नगरिहा भैय्या

सबले बढ़िया नगरिहा भैया 
धरती मैय्या के सेवा बजाय 
बासी चटनी पेज ला खाके
सुग्घर अपन जिंनगी पहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

सुख-दुख के बेरा मा आके 
सब झन सन मिलके गोठियाय
 रहिथे वो रयपुरा गांव में 
सरस्वती के गुण ला गाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

दीया सही अंजोरिया करथे 
सुमता के रद्दा हे बताय
मधुर सहित के अगवा बनके
फुल बगिया कस हे सिर जाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैया...

छत्तीसगढ़ के नगरिहा बेटा 
करनी कहिनी कही न जाय 
तोर दया ले तोर मया ले 
अड़हा लइका गंगा नहाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जन्मदिवस हे आज तोरे
जन जन मिलके खुशी मनाय
दे संदेश भाईचारा के 
गोंदा फुल कस ममहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जिंदगी तोर सलामत राहय 
तोषन धनगंइहा गोहराय 
बनके सूरुज तै नील गगन में 
रहिबे नवा अंजोर बगराय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

तोषन कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

दान


प्रदत्त विधा:- घनाक्षरी
विषय   :- दान
दिनांक:- 15/12/19 रविवार
★★★★★★★★★★★★★★
गाथा दान के हे बड़े,छोटे बड़े सब करे,
बड़े बड़े ऋषि मुनि,करते बखान है।

दानी राजा हरिश्चंद्र,तज दिये राजपाठ,
दान का प्रमाण दिया,जाने ये जहान है।

कबूतर प्राण खातिर,राजा शिवि माँस त्यागे,
दिया सीख मानवता,गाते जो पुराण है।।

दान करो मिल सब,अर्थ कर्म ज्ञान सेवा,
महिमा दानवीरों की,सबसे महान है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...