●●●●●कलम की सुगंध छंदशाला●●●●●
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कुण्डलियाँ शतकवीर हेतु
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दिनांक - 16.12.19
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कुण्डलियाँ (1)
विषय-वेणी
लाती मन मुस्कान ये,देख अजब श्रृंगार।।
वेणी है अभिन्न अंग,शोभित होती नार।
शोभित होती नार,खिले गजरा इठलाती।
मन को भाती साज,रूप यौवन मधुमाती।।
कह तोषन कविराज,शाम या पवन प्रभाती।
वेणी कैसी साज,सोच है हिय मे लाती ।।
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कुण्डलियाँ (2)
विषय-कुमकुम
कुमकुम से ही शान है,माने नारी आज।
शोभित नारी जिंदगी,नारी का है ताज।।
नारी का है ताज,मान है जग में पाता।
रहे सदा जो साथ,बलम से निर्मल नाता।।
कह तोषन कविराज,रहो कभी नहीं गुमसुम।
हे भारत की नार,माँथ सिरजाओ कुमकुम।।
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रचनाकार का नाम
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद, छत्तीसगढ़
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