*वेणी*
अधोभाग में झूमती,पृष्ठभाग बन नाग।
वेणी तेरी हर छटा,गाती फगुवा राग।
गाती फगुवा राग,नगाड़ा हिवड़ा बाजे।
नागिन सम इठलाय,संग नित गजरा साजे।
कह तोषन कर जोरि,साध कोई नवी सधो।
नयनन भी हरषाय,देख वेणी भाग अधो।।
*कुमकुम*
कुमकुम भाग्य नार की,बाग पुष्प महकाय।
चुटकी भर सिन्दूर से,जीवन है सिरजाय।।
जीवन है सिरजाय,रही है सदा सुहागिन।
जिनके रहे न माथ,नार ये बड़ी अभागिन।।
जीवन का श्रृंगार, कभी रखे नहीं गुमसुम।
है सजनी का प्यार,जगाती भाग्य कुमकुम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
५:३५अपरान्ह मंगलवार १७/१२/१९
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