सोमवार, 17 अप्रैल 2017

मया के चिनहा

तोर मया के चिनहा ल
राखे रहूं सजाके।
मोर हिरदे के कुरिया म
ठोहूं तारा लगाके।

अगोरा म तोर बइठे हावंव
रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा
लहूं चूरी पहिराके।।

मोर मया के कुरिया ल
कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल
कब सतरंगी रंग भरबे।।

मोरो सुध तै लेले पगली
बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना
मोर जी के जंजाल हे।

मया के चिनहा देके तैहा
जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके
काबर टुंहू देखात हस।।

मर जहूं तोर सुधरई मा
जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली
जिनगी के मोर उद्धार कर।।

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