टुटे दिल का कोई खरीद दार नहीं होता
आँखों में नमी ,इश़्के गुलज़ार नही होता
होती है तन्हाई का मंजर और यादों का समंदर
चाह रह जाती अधूरी कोई तलबगार नहीं होता
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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