रविवार, 23 अप्रैल 2017

बेटी

एक दिन मोर अंगना म किलकारी मारत ,चिरइ सही चहकत ,कोयली बरोबर कुहुकत,मोर बेटी ह खुशी के पेटारा धरके अइस ,जेकर गोड़ के माड़त मोर घर म दुख दरिदरी बिपत्ति जतिक रिहिस सब ह हवा के बड़ोड़ा सही उड़ागे,काबर सियान मन कथे बेटी ह साकछात माता लछमी के सरुप हरे ओकर घर म आय से घर के आव भाव बदल जथे वइसने मोरो बदल गे। तितली बरोबर एती ले ओती घर के चारो कोती गिंजरे ।हंसी ठिठोली करत अपन तोतरी भाखा म मोला जब ददा कहे। त मोर अंतस ल अजब सकुन मिले करेजा ल ठंडक मिले।जेन बेटी ह पेट के बल घसलत माड़ी के सहारा मड़ीयात ठुमुक ठुमुक रेगत कइसे बड़े होगे ,दिन कइसे निकलिस पताच निचलिस ।आज मोला बड़ दुख होवत जेन बेटी ल ननपन ले पालत पोसत बड़े करेंव आज उही अपन करेजा के टुकड़ा ल अपन तन ले अलग करके ओला अपन लेे कोस दुरिहा दुसर के डेहरी म बिदा करत हंव। अब कोन मोला चाय पानी बासी पेज बर हांक पार ही---

"आ ददा एदे चाय ,एदे पानी ,एदे बासी।"

तोषण कुमार चुरेन्द्र

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