लग गई नजर किसकी,बसंत बहार पर/
गुल नहीं कंटक खिलती,अब गुलजार पर/
बंद करें युद्ध लड़ना,अमन रहे जमीं
कर फना जनम अपना,पुनित संसार पर
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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