बुधवार, 19 अप्रैल 2017

गंगा मंइय्या

तोर मया के बरसा दाई झुमर झुमर के बरसय।
आस पूरो सबके माता झन कोन्हो ह तरसय।।
जल भीतरी ले जनम धरे गंगा मंइया कहाय।
नर नारी सब भक्तन मन के आस ल तै पुराय।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...