जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।
मेरी तन्हाई को देखकर हंस रही थी वो इस कदर
आँसू पोछने भी नहीं आई कमबख़्त अकेला जानकर....
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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