झन कर गरब गुमान झन कर गरब गुमान रे
भैय्या मोर जायेला परही शमशान
पाँच रतन के बने तोर काया
जेकर नँइहे ठिकाना।
चारेच दिन हरिहर पाना
पाछू परेहे अइलाना
समय रहत पहिचान
समय रहत पहिचान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
कौड़ी कौड़ी जोड़े खोंधरा बनाए
एक दिन छोड़ के जाना
साथी संगी सब रही जाही
जग के हे रीत पुराना
सुनले सिरतो ईमान
सुनले सिरतो ईमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
माटी माटी के काया बने हे
माटी मा मिल जाही
धरम करम के करले कमाई
पुरखा हा तर जाही
झन तै बिरथा जान
झन तै बिरथा जान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद छ.ग.
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