बुधवार, 7 अगस्त 2019

मनुज आचरण


मनुज आचरण बने रखव,मीठा रखव जुबान।
क्षमाशील गुनवान बनव,रहव दया के खान।।

मुढ़ अनपढ़ बर शास्त्र के,रथे भला का दाम।
थस अंधरा बर दरपन के,रहय नहीं कुछु काम।।

अभिमानी अपन आप में,भरत रथे हूँकार।
अइसन मनखे दुनिया में,पावे ना सत्कार।।

सब झन मिलके बने रहव,चलत रहव सब साथ।
दिन दरिद के सेवा करव,कृपा करे रघुनाथ।।

कारज मन मा राखे ले,कभु पूरा नइ होय।
मुख भीतर नइ जाय हिरन,लगे शेर जब सोय।।

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...