मनुज आचरण बने रखव,मीठा रखव जुबान।
क्षमाशील गुनवान बनव,रहव दया के खान।।
मुढ़ अनपढ़ बर शास्त्र के,रथे भला का दाम।
थस अंधरा बर दरपन के,रहय नहीं कुछु काम।।
अभिमानी अपन आप में,भरत रथे हूँकार।
अइसन मनखे दुनिया में,पावे ना सत्कार।।
सब झन मिलके बने रहव,चलत रहव सब साथ।
दिन दरिद के सेवा करव,कृपा करे रघुनाथ।।
कारज मन मा राखे ले,कभु पूरा नइ होय।
मुख भीतर नइ जाय हिरन,लगे शेर जब सोय।।
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद
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