पालन पोषण गाय का,भूल गया इंसान।
गोद बिठाये घूमता,लेकर मानव श्वान।।
लेकर मानव श्वान,रौब है बड़े जताते।
गौमाता को भूल,श्वान को दूध पिलाते।।
कैसा है इंसान, दिखायें कैसे चालन।
होगा कैसे जान,गाय का लालन पालन।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
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