कुण्डलियाँ
*साहित्य*
जीवन का आधार है,चारों वेद पुराण।
गीता रामायण पढ़े,तृप्ति मिलेगी प्राण।।
तृप्ति मिलेगी प्राण,तभी उद्धार हमारा।
करिए सदा प्रचार, जहाँ साहित्य बिसारा।।
कह तोषन कविराज, ध्यान कर नित तन मन का।।
रखें इसे सम्हाल,सार है ये जीवन का।।
*विकृत पाठ*
रेखा माला घन जटा,दण्ड शिखा का पाठ।
ध्वज रथ मिलकर ये बने,विकृत पाठ हैं आठ।।
विकृत पाठ हैं आठ,संत मुनियों की बानी।
नहीं मिलेगी ठौर, धरा नभमंडल पानी।।
कह तोषन कविराय, दृश्य ये हमनें देखा।
अक्षर अक्षर भिन्न, जटा घन माला रेखा।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
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