गुरुवार, 19 मई 2016

मानवता

***** ॥मानवता॥ *****
काहत हे समय आज के
झन रो सबला हंसाबे तै
मानवता हे धरम करम तोर
 मानवता के गीत गाबे तै
फइले दुनिया म नफरत
नदी प्रेम के बोहाब तै
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दीन दुखिया के सेवा में
अपन करतब नाभाबे तै
दीन दुखिया मनखे के
 जतन करे लाभ उठाबे तै
 खंचवा पाट भेदभाव के
सबला गला लगाबे तै
 पाप कपट ले मुंह ल फेरे
 पुण्य के लाभ उठाबै तै
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हम सब भाई भाई सफ्फे
 झन कोई ल ठुकराबे तै
बगिया सबे महके सबरदिन
बन प्यार फूल मुसकाबे तै
 मन सबके खिलखिला उठै
 भाईचारा मेलजोल बढाबे तै
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असहाय के सहारा बन जा
आशीष भगवान के पाबे तै
मानवता हे सार जगत में
मानवता ही लेके जाबे तै।
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 #आचार्य_तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
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