सोमवार, 16 मई 2016

सुरता के गोठ

॥सुरता के गोठ॥
 बेलबेलही टूरी आथे सुरता जब तोर ओ
 नंगत बासी खाथे सोनू पेट भरे तब मोर ओ।
 सुरता बैरी जेन दिन गउ तोर नइ आवय।
 सोनू ओदी बासी छोड़ भात गजब खावय।
सुरता म तोर सोनू के गजब देंहे पनकत हे
 गोंदली बंगाला चटनी संन बासी झड़कत हे।
भात जब खावय सोनू गोहरावय इही बात ।
बासी ल खाते रहूं धन कभू होही मुलाखात।
आथे तोर सुरता पगली पिच्चर देखेल जाथंन।
कब आबे मोर गांव रे संगी इही गाना ल गाथंन।
बासी भात कब तक निपटाहूं खीर घलो खवा।
तिही सोनू के मया के रोग तिही ओखर दवा।
भात बासी के रंधई मा हांथ गोड़ मोर करियागे।
तोर सुरता म सोनू भाई के मति घलो छरियागे।
सोनू के दुख देखे नइ जावय आवत हन साथ मा।
 लाबो तोला भंवरा के संगी दे हाथ ले हाथ मा।
 #सोनू_के_मितान_आचार्य_तोषण
टीप :- गलती बर छमा चाहूं।

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