गुरुवार, 19 मई 2016

मां

यह रचना मेरी दिवंगत माताजी को सादर समर्पित
 ****************** ॥ मां ॥ *****************
मां तू चली गई कहाँ छोड़कर बियाबाँ जग मग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।
जो तू थी साथ मेरे मुझको कोई गम न था।
जाने से तेरे पहले कभी आंखें कभी नम न था।
याद तुझे करके रोता बहते लहू मेरी रग रग में।
 चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
 भुखी रहकर हमें खिलाई सुलाती हमें खुद जगती थी।
हम जो हंसते तू हंस लेती जख्मों पर मरहम भरती थी।
छिपाने धूप से हमको मां छांव बन चली मग मग में
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
बाधाएं कितनी भी आई बनी ढाल तू खड़ी रही।
रक्षा करने हमारी खातिर बन तलवार तू अड़ी रही।
  गाथा तेरी अमर है मां याद रहेगी हर युग युग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
 जाने से तेरे थम सा गया बचपन मेरा हंसता पूरा।
मां जो रहती पास मेरे रहता न जीवन मेरा अधूरा
रहेगा आशीष साथ मां का हीरा सा चमकूंगा नग नग में।
 चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
************* I Miss you "MATAJI" *********
 मां का लाडला-
आचार्य तोषण
लाडले का गांव
-धनगांव डौंडीलोहारा,
बालोद ९६१७५८९६६७

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