गुरुवार, 19 मई 2016

दाई



दाई तोर पांव के धुर्रा मोर माथ के चंदन ।
 जनम देवइय्या दाई करथंव तोला वंदन।।
 नव महिना कोख म राखे घाम पियास ल सहिके।
बने गुणी मोर ललना पढे कथा कहानी कहिके।।
  जनम धरेंव खेलेंव कुदेंव धरती दाई के कोरा मा।
 दाई तैहा बइठे डेढोली सांझे बिहाने अगोरा मा।।
नान्हेपन ले बड़े करे कोदई बासी खवाके।
बनेबने हमला राखे सरदी बरसा ले बचाके।।
 आशीष देदे तैहा दाई दुध के करजा चुकाहूं।
 पूरा नी होही ए दारी त फेर नवा जनम धर आहूं।।
 हीरा मोती सोना चांदी हे सब जीनिस के मोल।
 जग मा जेकर थाह नीहि दाई के मया हे अनमोल।।
 दाई जइसन दुनिया मा अऊ दुसर जहान नहीं।
बन जा कतको महान दाई ले कोई महान नहीं।।
 दाई बर जतका लिखहूं ओतकी दाई बर कम हे।
 नीहस दाई आज मोर करा जादा सबले मोला गम हे।।
 मुड़ मा हांथ रखिबे दाई बने रही मोर धरम करम।
हावा आए आए गरेल आंधी म झन रूके कदम।।
 सदा आशीष बरसाबे दाई नित नवागोठ सिखते राहंव।
लइका सियान जवान मितान दाई दीदी बर लिखते राहंव।।
*******************
एक घांव अउ जम्मो महतारी
 मनला चरण छुके परणाम
 *******************
 -आचार्य तोषण गांव-धनगांव ,

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...