॥ बिहाव लहर ॥
बर बिहाव के चारो मुड़ा उडत हावय गजब शोर।
पोंगा बाजा अउ डीजे के अवाज बाजय कानफोर।
जगा जगा बिहाव लाडू बरा सोंहारी झड़कत हे।
काखरो बर पानी ठंडा कोन्हो पियत सरबत हे।
साजे मडवा पेड़ चार के गंडवा बाजा बाजत हे।
मैन नाचा हरदाही माते नंगतेहे दोहा पारत हे।
दुल्हा सनाय हरदी मा हरिहर काया पिंवराय।
दुल्हनिया घलो कम नही मुसमुस मन मा मुसकाय।
कुम्हडा बटरा आलू दार संग लपेटे पटवा भाजी।
टुरा टुरी राजी हावय काय करय मुल्ला काजी।
बरतिया जाय बर लगेहे बोलेरो वेन टाटा सफारी।
धरम टीकान म टीकय आनी बानी लोटा थारी।
आवय दुल्हिन जब अंगना घर मा पूजा पाठ करवाय।
बेटा बेटी के बिहाव रचाके सबझन खुशहाली मनाय।
आचार्य तोषण
बर बिहाव के चारो मुड़ा उडत हावय गजब शोर।
पोंगा बाजा अउ डीजे के अवाज बाजय कानफोर।
जगा जगा बिहाव लाडू बरा सोंहारी झड़कत हे।
काखरो बर पानी ठंडा कोन्हो पियत सरबत हे।
साजे मडवा पेड़ चार के गंडवा बाजा बाजत हे।
मैन नाचा हरदाही माते नंगतेहे दोहा पारत हे।
दुल्हा सनाय हरदी मा हरिहर काया पिंवराय।
दुल्हनिया घलो कम नही मुसमुस मन मा मुसकाय।
कुम्हडा बटरा आलू दार संग लपेटे पटवा भाजी।
टुरा टुरी राजी हावय काय करय मुल्ला काजी।
बरतिया जाय बर लगेहे बोलेरो वेन टाटा सफारी।
धरम टीकान म टीकय आनी बानी लोटा थारी।
आवय दुल्हिन जब अंगना घर मा पूजा पाठ करवाय।
बेटा बेटी के बिहाव रचाके सबझन खुशहाली मनाय।
आचार्य तोषण
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