#नइ_चलय_चतुराई
एकझन मुरतीकार बहुत चउतरा ।हर रोज मुरती बनाय । हर रोज आखरी में बाचे माटी के अपन मुरती बनाय ।अइसे ढंग ले ओखर जिनगी चलत रहय।
एक दिन यमराज ह अपन सइनिक मन ला बलइस अउ कथे " तूमन धरती लोक मा जाव अउ एक झन मुरतीकार के परान ल हर के लावव। यमराज के आग्या ल मानके यमराज के सइनिक मन मुरतीकार के घर मा जाथे।
मोहाटी मा सइनिक ल देख के मुरतीकार पुछथे "तुमन कोनव जी"। "हमन यमराज के
सइनिक हरन तोला लेगेल आहन " स इनिक मन किहीस ।
मुरतीकार ऊंखर बात ल सुनिस ।एक कनिक सन खाके पटवा म गिरगे। समहल के उठीस अउ कथे "में एक्कन आथो"।अइसे कहिके खोली म खुसर गे। देखत देखत अरकरहाच जान होगे ।तभो ले मुरतीकार नइ निकलिस । तब फेर सइनिक मन खोली ल जाके देखथे त अकबकागे अउ कथे याहद्दे रे इहाँ तो बड़ाकन एक्के मुंहू वाला मुरतीकार हे ।"अब काखर परान ल धर के लेगबो महराज करा" अइसे सोंच के सइनिक मन लहुट जथे अउ सफ्फा बीते बात ल बताएके बाद कथे "ओ मुरतीकार बहुंत चउतरा हे अब तिही जाबे तभे बनही यमराज महाराज"
बिहान दिन यमराज ह मुरतीकार के घर मे पहुंचथे । तब मुरतीकार पुछथे आप तुमन कोन हरशव महाराज ? "#यम_हरंव_मैं_मैं_हरंव_यम " यमराज ह कहिथे।
"कइसे आना होईस महराज ए गरीब के कुटिया मा।" मुरतीकार पुछिस। यमराज कथे "मे तोला लेगे बर आहों अऊ तोला लेके ही जहूं।"
"लेना का होही महराज जाबोच निही। फेर हमर घर बड़े दिन मे आहस भई रूखा सूखा थोरे राखहूं। ठंढा वंढा चलथे निही महराज।" मुरतीकार किहीस । ठंढा के नांव ल सूनिस यमराज के मुंहू म पानी आगे। यमराज ह कथे "ले ठीक हे त जादाच जीद करत हस ते लान डर रे भई।"
मुरतीकार रंधनी खोली म जाके फिरिज ले ठंढा के बोतल निकालथे अउ ओमा बेहोशी के दवा डालदेथे ।ठंढा लेजाके यमराज ल देदेथे ।सोसन भर यमराज ह ठंढा पीथे। जइसे पूरा ठंढा उरकिस यमराज के चेत बुध खोके बेहोश होगे। यमराज के हालत ल देखके मुरतीकार यमराज के परची ल देखथे सबले उप्पर मे मुरतीकार के नांव रथे। मुरतीकार बड चउतरा। सफेदा लान के अपन उप्पर के नांव ल कांट के सबले खाल्हे म लिख दिस।
अब एती यमराज के बेहोशी टूटीस ।मुरतीकार ल कथे "मजा आगे जी अतिक पान तो मेहा अपन लोक म नी सुते रेहेंव। मे तोर सेवा ले भारी खुस हंव।" अतिक बात ल सुने मुरतीकार खुस होगे। यमराज फेर कथे "एकठन बात बतात हंव मेहा सबले पहिली तोला लेगेल आए रेहेंव फेर अब उप्पर डाहर ल छोड़के खाल्हे डाहर ले शुरू करथंव।"
अतिक बात ल सुनिस ते मुरतीकार के परान हरागे जीव छुटगे।
सीख:
मौत के आघू मा कतरो बहाना करले आही अउ ले जाही।
सुने कहनी ल सुनाएहंव भूल चूक बर छमा चाहूं।।
सोमवार, 16 मई 2016
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