मन फाँसले
जीवरा जरत हे
बने हाँसले
कोयली बोली
करेजा बेधे बान
हाँँसी ठिठोली
सुरता तोर
आँसू धार बोहाय
मया कठोर
मोला भुलागे
छोड़ दिए मोला
कहाँ लुकागे
मया के गोठ
जग अमर रही
गुड़हा सोठ
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें