वार्णिक मुक्तक
*तुझको ही चाहा मैनें, तुमसे ही प्यार किया।*
*छोड़ सब कुछ सजनी तुमपे वार दिया।*
*यूँ जाना ही था जो मुझको छोडकर पगली,*
*बेवफा प्यार का क्यूँ मुझसे इकरार किया।।*
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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