विरह गीत
सुरता हा तोर जब जब आथे मोला गजब सताथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो
बइहा बरन मैं किंजरत रहिथौं तरिया नरवा मेंड़ पार मा
सुध नइ राहय मोला रे पगली खोजँव डोंगरी पहाड़ मा
रहि रहि के तोर भोली सुरतिया आँखी के आगू म आथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....१
कोयली मोला मारै ताना पूरवइया बिजरावत हे
चंदा रानी मुँहु लुकाथे सूरुज ह आँखी देखावत हे
आजा लहुट के तै मोर संगी मया ह मोर बलाथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....२
मर जाहूँ मैं तोर बिन रानी नइहे मोर ठिकाना
का करिहँव सुन कहाँ जाहूँ बैरी मोला बताना
तिही बताना मया के गोठ ल कइसे सब बिसराथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो...३
तोषण कुमार चुरेन्द्र
२१/७/१७
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें