दिनांक :-२७/११/१९
विषय :-प्रदत्त चित्र आधारित रचना
विधा :-कुण्डलियाँ
निकले जहरीली धुआँ,व्याकुल है संसार।
चारो दिक में चिमनियाँ,करते हाहाकार।।
करते हाहाकार, व्योम में बनकर दानव।
मुश्किल में है प्राण,पेड़ के हो चाहे मानव।।
कह तोषन कविराज, राह है बड़ी कटीली।
घटे परत ओजोन,धुआँ निकले जहरीली।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
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