माटी ले बने हँव संगी, माटी मा जड़े हँव।
कभू किसान त कभू, जवान बन खड़े हँव।
छल कपट ले तारे बर,सत के दिया बारे बर,
बन के लेखनी लड़े बर तोषण तीर अड़े हँव।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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